303 दिल्ली प्रान्त में कारखाना निरीक्षण और श्रम कल्याण अधिकारी - Page 373

358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

303

* दिल्ली प्रान्त में कारखाना निरीक्षण और श्रम कल्याण अधिकारी

964. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) दिल्ली प्रान्त में कारखाना निरीक्षकों और श्रम कल्याण अधिकारियों की संख्या कितनी है और क्या उनमें स्त्रियां भी हैं_

(ख) क्या इन अधिकारियों ने कारखानों में कामगारों के लिए उचित निवास क्वार्टर सुलभ कराने की अत्यावश्यकता के बारे में रिपोर्ट दी है और यदि हां, तो सरकार ने इस विषय में क्या कदम उठाए हैं अथवा उठाने का विचार है_ तथा

(ग) यदि (ख) का उत्तर नकरात्मक है तो क्या सरकार का विचार इस विषय पर तुरन्त रिपोर्ट मांगने का है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) दो पूर्णकालिक कारखाना निरीक्षक और दो अपर कारखाना निरीक्षक हैं। बाद वाले अंशकालिक हैं। यहां कोई भी श्रम कल्याण और प्रसूति केन्द्र नहीं हैं। दिल्ली नगर पालिका, दिल्ली के लोगों के संबंध में बम्बई मैट्रनिटी बेनीफिट्स एक्ट, 1929 के अधीन निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करती है।

(ख) नहीं, बाद वाला भाग उत्पन्न नहीं होता।

(ग) सरकार औद्योगिक मजदूरों के आवास के सामान्य प्रश्न पर उचित समय पर विचार करेगी। इसलिए केवल दिल्ली प्रांत की बाबत विशेष रिपोर्ट मांगने का कोई विचार नहीं है।

श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः श्रीमन्, क्या मैं यह जान सकती हूं कि क्या सरकार पूर्णकालिक महिला कल्याण अधिकारी को नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार करेगी?

श्री एन.एम. जोशीः आवास के बारे में ‘‘उचित समय’’ का क्या अर्थ है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझा कि यह कोई बहुत अप्रायिक पद है जिसकी व्याख्या करना जरूरी हो।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1422.