विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 359
304
* दिल्ली कारखानों में मजदूरों को लगाने के लिए ठेका प्रणाली
965. श्रीमती के. राधा बाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या दिल्ली में कारखानों में मजदूरों को अभी तक ठेका प्रणाली द्वारा रखा जाता है_ यदि हां तो (i) किन-किन कारखानों में यह प्रणाली लागू है_ (ii) इनमें से प्रत्येक कारखाने के द्वारा इस प्रणाली के अंतर्गत नियोजित स्त्री-पुरुष कामगारों की संख्या कितनी है, (iii) कामगारों की औसत दैनिक मजदूरी और महंगाई भत्ते की दर क्या हैं, तथा (iv) क्या कामगारों को फैक्टरीज एक्ट और मैट्रनिटी बेनीफिट्स एक्ट के अधीन सुविधाएं प्राप्त हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हां। कुछ कारखानों की दशा में ऐसे कारखानों की सूची पटल पर रखी जाती है। ठेकेदारों के माध्यम से नियोजित कामगारों की संख्या के बारे में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। लेकिन ऐसे व्यक्तियों की संख्या कम है और वह कोयले की लदाई-ढुलाई तक सीमित है। औसत दैनिक मजदूरी और महंगाई भत्ते की दर संबंधी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। लेकिन महंगाई भत्ता दस रुपए से लेकर 32 रुपए प्रति माह है और उन कारखानों में जिनमें कोई महंगाई भत्ता नहीं दिया जाता, मूल वेतन बढ़ा दिया गया है। सभी कारखानों में कामगारों को फैक्टरी एक्ट और बम्बई मैट्रनिटी बेनीफिट्स एक्ट के अधीन सुविधाएं प्राप्त हैं।
दिल्ली में उन कारखानों की सूची जिनमें तारीख 13 मार्च, 1945 के प्रश्न संख्या 965 में उल्लिखित मजदूर ठेकेदारों के माध्यम से नियोजित किए जाते हैं।
बिरला कॉटन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड
महावीर कॉटन स्पिनिंग विविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड
दिल्ली क्लॉथ एण्ड जनरल मिल्स कम्पनी लिमिटेड
लतीफी प्रिंटिंग प्रैस
ग्वालियर पोटरीज लिमिटेड
ईश्वर पोटरीज लिमिटेड
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1422-23