305 दिल्ली कारखानों में स्ति्रयों की औसत मजदूरी - Page 376

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 361

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस विषय से सरकार का कोई संबंध नहीं हैं।

प्रो. एन.जी. रंगाः क्या यह सच है कि रॉयल कमिशन ऑन लेबर ने सरकार से सिफारिश की थी कि वह इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष कदम उठाए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि मेरे माननीय बंधु उन मजदूरों की ओर संकेत कर रहे हैं, जो सरकारी विभागों में ठेकेदारों के माध्यम से काम पर लगाए जाते हैं, तो निश्चय ही इस विषय पर विचार किया जाएगा।

श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं यह जान सकता हूं कि क्या सरकार इस ठेका प्रणाली के अंतर्गत भर्ती किए गए मजदूरों के कल्याण को श्रम कल्याण का विषय नहीं मानती?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय बन्धु जैसा चाहें निष्कर्ष निकाल सकते हैं।

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* दिल्ली कारखानों में स्त्रियों की औसत मजदूरी

967. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) दिल्ली कारखानों में नियोजित स्त्रियों की औसत मजदूरी क्या है और क्या उन्हें रोजाना के हिसाब से भुगतान किया जाता है या महीने की दर से_

(ख) उन्हें कितना महंगाई भत्ता दिया जाता है_

(ग) क्या इस प्रकार का काम करने वाले स्त्री-पुरुष कामगारों को दिए जाने वाले वेतन और महंगाई भत्ते में कोई अन्तर है और यदि हां, तो उस अन्तर के क्या कारण हैं_

(घ) क्या इस ठेका प्रणाली के अंतर्गत काम पर लगाई गई स्त्रियों को वही वेतन और महंगाई भत्ता मिलता है, जो सीधे भर्ती की गई स्त्रियों को मिलता है और यदि कोई अन्तर है तो उसके क्या कारण हैं_

(घ) क्या कोई कारखाना प्रसूति और बाल-कल्याण सुविधाएं सुलभ कराता है और यदि हां, तो किस तारीख से_

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1945, 13 मार्च, 1945, पृष्ठ 1424-25