362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(च) क्या इनमें से किसी कारखाने में उनके कर्मचारियों के बालकों की देख-रेख के लिए शिशु गृह की व्यवस्था है या कोई अन्य इंतजाम किए गए हैंः तथा
(छ) यदि (घ) और (च) का उत्तर नकारात्मक है तो क्या सरकार का विचार कारखाने के मालिकों को आवश्यक इंतजाम करने के लिए विवश करने के लिए तुरन्त कदम उठाने का है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) दिल्ली में कारखानों में नियोजित स्त्रियों की औसत मजदूरी संबंधी आंकड़े फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। कुछ कारखानों में स्त्रियों को महीने के हिसाब से भुगतान किया जाता है और दूसरे कारखानों में टुकड़ों में या दैनिक हिसाब से भी।
(ख) कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिर भी स्त्री मजदूरों को महंगाई भत्ता दस रुपए से 32 रुपए तक दिया जाता है।
(ग) जहां तक ज्ञात है, एक ही प्रकार का काम करने वाले स्त्री-पुरुषों को जो मजदूरी और महंगाई भत्ता दिया जाता है उसमें कोई अंतर नहीं है।
(घ) जहां तक ज्ञात है, कारखानों में स्त्रियों को सीधे काम पर लिया जाता है, न कि ठेकेदारों की मार्फत।
(घ) दो कारखानों में प्रसूति और बाल कल्याण की सुविधाएं सुलभ हैं।
(च) हां, दो कारखानों में शिशु गृह की सुविधा है। एक कारखाने में कर्मचारियों के बालकों के लिए रोजना मुफ़त स्नान की व्यवस्था है और अल्पपोषित बालकों को रोजाना आधा सेर दूध मुफ़त दिया जाता है। दूसरे कारखानों में कर्मचारियों के बालकों को कारखानों द्वारा चलाए गए स्कूलों में मुफ़त शिक्षा दी जाती है और सभी बालकों को रोजाना आधा-आधा-सेर दूध मुफ़त दिया जाता है।
(छ) प्रश्न नहीं उठता।
सर विट्ठल एन. चन्दावरकरः क्या मैं यह जान सकता हूं कि क्या दिल्ली प्रान्त में दिल्ली प्रान्त का अपना कोई श्रम विभाग नहीं है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे इस प्रश्न के लिए का नोटिस दिया जाए।
श्रीमती रेणुका रेः क्या मैं यह पूछ सकती हूं कि क्या माननीय श्रम सदस्य को यह सुनकर आश्चर्य होगा कि धागे के कारखानों में 35,000 स्त्रियाँ हैं जिन्हें कोई महंगाई भत्ता नहीं मिलता और स्त्री पुरुषों को समान मजदूरी नहीं दी जाती तथा क्या