309 खानों में स्ति्रयों के भूमिगत काम करने पर निष्ोध की बहाली - Page 383

368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(च) कुछ बड़ी खानों में महिला डॉक्टर और पर्याप्त कर्मचारी नियोजित किए जाते हैं। बहुत-सी खानें अस्पताल में मिड-वाईव्ज और नर्सों की व्यवस्था करती हैं। प्रश्न का दूसरा भाग उत्पन्न नहीं होता।

श्रीमती के. राधा बाई सुब्बारायणः क्या मैं यह पूछ सकती हूं कि क्या सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए सभी खानों में एक-से इंतजाम करेगी?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह विषय हमारे विचाराधीन है।

श्री एन.एम. जोशीः इस तथ्य की दृष्टि से कि सदन ने स्वयं भूमि के नीचे स्त्रियों के रोजगार के विरूद्ध घोषणा की है, क्या भारत सरकार अब इस विधान- मण्डल की इच्छा के अनुसार निषेध लागू करेगी?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार में सदन का फैसला गुणावगुण पर आधारित होने के बजाय एक राजनीतिक कार्रवाई अधिक है।

प्रो. एन.जी. रंगाः उन्होंने सदन का इरादा जानबूझकर गलत समझा है।

अब्दुल करयूमः व्यवस्था के मुद्दों पर क्या माननीय सदस्य ऐसी व्याख्या करने के लिए स्वतंत्र हैं कि सदन के सुविचारित फैसले के बारे में ‘हेतु’ का लांछन लगा दिया जाए? यदि हां, तो आगे चलाना बहुत कठिन होगा। हमारी सरकार गैर-जिम्मेदारी है और यदि इस तरह की बात करेंगे तो......

अध्यक्ष करयूमः क्या वह हेतु का लांछन लगा सकते हैं?

अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः जिस रूप में मैं माननीय श्रम सदस्य को समझा हूं, मुझे विश्वास है कि वह सदन को यह बताना चाहते थे कि इस सवाल पर राजनीतिक दृष्टिकोण सहित अनेक दृष्टिकोणों से विचार किया गया है। जो भी हो मैं नहीं समझता कि वह यह कह कर कि इस सवाल पर राजनीतिक आधारों पर विचार किया गया है, सदन पर किसी गलत हेतु का लांछन लगा रहे हैं।

अब्दुल करयूमः व्यवस्था के मुद्दे पर माननीय सदस्य ने जो कुछ कहा है, उसके बारे में शासकीय रिपोर्ट देखी जाए। उन्होंने कहा था कि यह एक राजनीतिक कार्रवाई है।

श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं यह जान सकता हूं कि क्या भारत सरकार ने इस विधान-मण्डल द्वारा मतदान के बाद इस सवाल पर फिर से विचार किया था?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने जो कुछ कहा है उससे अधिक कुछ नहीं कहना है।