विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 369
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* भारत के खनिज संसाधनों के विषय में
डॉ. कृष्णन के सुझाव
1773. प्रो. एन.जी. रंगाः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या उनका ध्यान 14 मार्च को मद्रास में प्रोजीडेंसी कालेज की जियोलोजी एसोसिएशन के समक्ष डॉ. एम.एस. कृष्णन द्वारा दिए गए व्याख्यान की रिपोर्ट की ओर दिलाया गया है जो 14 मार्च के ‘‘हिन्दू’’ में छपी हैं_
(ख) तांबा, चांदी, निकल, प्लेटिनम, टिन, मर्करी, ग्रैफाइट और पोटाश, के पर्याप्त परिणाम प्राप्त करने के लिए और उनके संसाधन बढ़ाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं_
(ग) उन सब प्रांतों में जिनमें सुगम कोयला खानें नहीं हैं, हाईड्रोलिक (विद्युत) शक्ति का विकास और दोहन करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं ताकि स्थानीय उद्योगों को विकसित किया जा सके_
(घ) क्या विंड थ्रू विंड मिलों से बिजली लेने के लिए और विंड मिलों के उद्योग को लोकप्रिय बनाने के लिए कोई कदम उठाए जा रहे हैं_ और
(घ) क्या विभिन्न खनिजों की क्वालिटी परिमाण का आकलन करने के लिए सुसज्जित प्रयोगशालाएं स्थापित करने के डॉ. कृष्णन के सुझाव के बारे में तथा इस सुझाव के बारे में भी कि स्थानीय तौर पर उपलब्ध खनिजों के उपयोग को आयात किए गए खनिजों से अधिमानता दी जाएगी, पूरी तरह अध्ययन किया जाएगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हां।
(ख) युद्ध के दौरान कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों और सम्बद्ध पदार्थों का सामरिक स्टाक भारत में बनाने का प्रस्ताव सरकार के विचारधीन था। किन्तु वह कार्यान्वित नहीं हो पाया। सरकार उन चीजों के पुनरीक्षण पर विचार कर रही है जिनकी भारत में कम आपूर्ति है।
(ग) आमतौर पर ऐसे अन्वेषणों के लिए फिलहाल उपलब्ध पूरी तकनीकी मनुष्य शक्ति से हाईड्रो-इलैक्ट्रिक शक्ति संसाधनों का विकास और दोहन करने के लिए
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 5, 1945, 12 अप्रैल, 1945, पृष्ठ 3899-3901