310 भारत के खनिज संसाधनों के विषय में डॉ- कृष्णन के सुझाव - Page 385

370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

प्रांन्तीय और रियासतों की सरकारों द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। सैन्ट्रल टैक्निकल पावर बोर्ड, मानव शक्ति की अपनी वर्तमान संख्या के अधीन रहते हुए, कुछ मामलों में पहले ही सहायता दे रहा है और पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों के प्राप्त होने पर और अधिक सहायता करेगा। भारत सरकार पूरे देश में हाईड्रो-इलैक्ट्रिक प्रणाली के विकास के बहुत बड़े उपाय की आवश्यकता से पूरी तरह परिचित हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो बड़े-बड़े कोयला भण्डारों से दूर है। किन्तु उसका विचार है कि और अधिक अनुभवी तकनीकी कार्मिकों के एक बहुत बड़े निकाय के बिना यह प्राप्ति नहीं की जा सकती और इस लक्ष्य को ध्यान में रखे हुए वह ठेके पर विशेषज्ञ तकनीकी कार्मिक करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।

(घ) इस समय वायु से विद्युत प्राप्त करने या वायु मिलों के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा कोई विशेष कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सरकार को सलाह दी जाती है कि ऐसे अधिष्ठापन जबकि मौसमी व्यवस्थाओं के अनुरूप चुने हुए क्षेत्रों में उपयोगी हैं, वे अलग-अलग बहुत-ही कम मात्रा में बिजली उत्पादन कर रहे हैं और वह भी रुक-रुक कर।

(घ) जियोलोजीकल सर्वे ऑफ इण्डिया (भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण) का हाल ही में पुनर्गठन किया गया है और इसकी प्रयोगशाला संबंधी सुविधाओं का काफी विस्तार किया गया है। खनिज और खनन विषयों पर मुफत सलाह और जानकारी देने की दिशा में और अधिक विस्तार किया जा रहा है। भारतीय खनिजों की क्वालिटी का आकलन करने के लिए हाल ही में नियोजित नेशनल मैटलर्जिकल लेबोरेटरी तथा नेशनल केमिकल लेबोरेटरी को पूरी तरह साधन-युक्त किया जाएगा और खनिज उद्योगों के विकास में दूसरे तरीकों से ये बहुत अधिक आवश्यक सिद्ध होंगी। कच्चे माल के रूप में खनिज और अयस्क के निर्यात के अधिमान में सरकार भारत में उनके घरेलू उपचार और उद्योग पर विचार कर रही है। 1944 से गठित अनेक उद्योग पैनलों ने इस शीर्ष के अंतर्गत मूल्यावान जानकारी और आंकड़े एकत्र किए हैं और नई खनिज नीति बनाने के लिए उनका अध्ययन किया जा रहा है।

प्रो. एन.जी. रंगाः जहां तक भाग (ग) का संबंध है, माननीय सदस्य का कहना है कि इन हाइड्रो-इलैक्ट्रिक बिजली संसाधनों को विकसित करने के लिए उन्हें बहुत सारे विशेषज्ञ चाहिए। सरकार अपेक्षित योग्यता और अर्हता वाले भारतीयों को इस दिशा में विशेषज्ञता प्राप्त कराने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है ताकि उनकी