16 श्रम वेतन के मानक को बढ़ाने की वांछनीयता - Page 43

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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* श्रम वेतन के मानक को बढ़ाने की वांछनीयता

86. डॉ. सर जि़याउद्दीन अहमदः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि वे कौन-से मानक या मापदंड हैं जिनके द्वारा श्रमिकों का वेतन निर्धारित किया जाता है_ और

(ख) रुपये की क्रय शक्ति में सोलह से छह आना तक की गिरावट को दृष्टि में रखते हुए क्या भारत सरकार ने श्रमिकों के दैनिक वेतन में आनुपातिक वृद्धि करने के लिए कोई कारवाई की है और यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) वेतन या मज़दूरी का प्रश्न नियोक्ता तथा श्रमिक के बीच संविदा का मामला होता है।

(ख) निर्वाह व्यय के वृद्धि, जिसके कारण क्रय शक्ति में कमी हुई है, समस्त भारत में एक समान नहीं हुई है। भारत सरकार ने वेतन में वृद्धि को लागू करने या कोई विनिर्दिष्ट मंहगाई भत्ते की स्वीकृति के लिए निम्नलिखित कारणों से कोई कार्रवाई नहीं की हैःµ

(1) सरकार ने अभी तक कानून द्वारा न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की नीति को स्वीकार नहीं किया है। वह बात ऐसी है जिस पर किसी अनिवार्यता या बाध्यता को लागू करने से पहले विचार करने की आवश्यकता है।

(2) समस्त भारत में ऐसी कोई सूचकांक नहीं है जिसके ऊपर जीवन-निर्वाह के वास्तविक व्यय की माप करने के लिए विश्वास किया जा सके। इसके परिणाम स्वरूप कोई विनिर्दिष्ट मंहगाई भत्ता निर्धारित नहीं किया जा सकता।

(3) चूंकि निर्वाह-व्यय में वृद्धि एक समान नहीं है, अतः केन्द्र से कोई ऐसी नीति निर्धारित करना संभव नहीं जो सभी प्रांतों में लागू की जा सके जबकि उनमें परिस्थितियां अलग-अलग मिलती हैं।

श्रम आयुक्तों की नियुक्ति तथा भारत रक्षा कानून के अंतर्गत निर्णय के लिए प्रावधान, युद्ध के समय में होने वाले विवादों के मामले में, सरकार द्वारा उठाए गए ऐसे कदम हैं जो श्रमिकों के लिए काम की उत्तम स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 16 फरवरी, 1943, पृष्ठ 267-68