17 कारखानों के श्रमिकों में असंतोष - Page 45

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जब तक हमारे पास ऐसा अधिनियम नहीं है जो सरकार को आंकड़े एकत्रित करने का हक दे, तब तक सूचकांक को समस्त भारत में तैयार कराना संभव नहीं है।

श्री एम.एम. जोशीः क्या मैं यह पूछ सकता हूँ कि क्या माननीय सदस्य यह जानते हैं कि केन्द्रीय विधान सभा का एक अधिनियम है जो सरकार को आंकड़े एकत्रित करने का हक देता है।

अध्यक्ष महोदयः (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः अगला प्रश्न।

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* कारखानों के श्रमिकों में असंतोष

87. डॉ. सर जि़याउद्दीन अहमदः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह जानते हैं कि कारखानों के कर्मचारियों में बहुत भारी असंतोष है और वह असंतोष इस कारण से है कि पूंजीपति जो असाधारण लाभ कमा रहे हैं, अपने मजदूरों को उनके वेतन में वृद्धि करके, उस लाभ में पर्याप्त हिस्सा नहीं दे रहे हैं_

(ख) माननीय सदस्य ने पूंजीपतियों पर इस बात के लिए दबाव डालने के लिए क्या कार्रवाई की है कि वे अपने लाभ में से उन लोगों को भी एक हिस्सा दें जिनके परिश्रम से उन्होंने लाभ कमाया है_ और

(ग) क्या माननीय सदस्य को यह जानकारी है कि कारखाने के मज़दूर में बेचैनी या असंतोष राजनीतिक चेतना के कारण उतना नहीं है जितना यह उनके नियोक्ताओं द्वारा उनका आर्थिक दमन होने के कारण हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जहां पर जब मूल्यों का रूख वृद्धि की ओर होता है, जैसा कि अब है, और जहां पर लाभ कमाया जा रहा हो वहां पर यह संभावना होती है कि श्रमिक हमेशा, अपने पारिश्रमिक में वृद्धि के लिए दावा करते हैं, सरकार यह जानती है कि ऐसे दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

(ख) उद्योग के लाभों का एक बहुत बड़ा भाग अधिक लाभ कर के रूप में सरकार के पास जाता है। नियोक्ता के पास जो हिस्सा रह जाता है, उसमें से बहुत से नियोक्ता बोनस का वितरण कर रहे हैं। सरकार को इस समय यह अवसर प्रतीत नहीं हुआ है कि इंगित उद्देश्य के सम्बंध में कोई कार्रवाई की जाए।

(ग) प्रश्न समझ में नहीं आया।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 16 फरवरी, 1943, पृष्ठ 268