18 एक श्रमिक का घरेलू बजट - Page 47

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मानती है। संलग्न विवरण भारत सरकार के पास अब तक उपलब्ध सूचना संक्षेप में प्रदान करता है।

विवरण

(सूचना नवीनतम उपलब्ध सूचना है, परन्तु यह अद्यतन नहीं है)।

मद्रासः 31 फैक्ट्रियों में अनाज की दुकानें हैं, उनमें से 13 नियोक्ताओं द्वारा खोली गई हैं और 18 कर्मचारियों की सहकारी समितियों द्वारा। अनेक मामलों में उनकी सहायता नियोक्ताओं द्वारा की जाती है।

50 फैक्ट्रियों में नियाक्ताओं ने संकट काल के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री की वस्तुएं सुरक्षित भंडार में रखी हैं, 6 फैक्ट्रियों में, संकट के समय, कर्मचारियों को पका खाना प्रदान करने की भी व्यवस्था की गई है।

दो फैक्ट्रियों में नियोक्ता कर्मचारियों के लिए कैन्टीन चला रहे हैं। बंगालः 146 फैक्ट्रियों में अनाज की दुकानें हैं और उन्होंने संकट काल के लिए सुरक्षित भंडार भी रख रखे हैं। इसके अतिरिक्त 35 फैक्ट्रियों द्वारा संकट काल के लिए केवल अनाज के भंडार रखे हुए हैं। 73 फैक्ट्रियों में संकट काल के दौरान पकाए गए भोजन की आपूर्ति की व्यवस्था है।

बम्बई/पंजाबः विस्तृत सूचना उपलब्ध नहीं है। परन्तु अनेक नियोक्ताओं ने अनाज की दुकानें

खोली हैं और उन्होंने अनाज के संकट कालीन भंडारों की यथासंभव व्यवस्था की है।

बिहारः प्रमुख नियोक्ताओं सहित, सात नियोक्ताओं ने अपने कर्मचारियों के लिए अनाज की दुकानें

खोली हैं और वे यथासंभव खाद्य सामग्री के संकट कालीन भंडार रख रहे हैं। एक प्रसिद्ध प्रमुख नियोक्ता ने अनाज की दुकानें चलाने के लिए एक सहकारी समिति को अग्रिम पूंजी प्रदान की है और कम किराए पर भंडार के लिए स्थान भी प्रदान किया है।

संयुक्त प्रांतः कानपुर में सभी बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों के पास अनाज की दुकानें हैं और संकटकाल के लिए यथासंभव सुरक्षित भंडार रखे जाते हैं।

मध्य प्रांत तथा बरारः नियोक्ताओं द्वारा अनाज की लगभग 14 दुकानें खोली गई हैं, एक नियोक्ता ऐसी दुकान खोलने के लिए ट्रेड यूनियनों की सहायता कर रहा है। लगभग सात प्रमुख/प्रसिद्ध नियोक्ताओं तथा ण्क सहकारी समिति ने संकट काल के लिए खाद्यान्न के भंडार के लिए व्यवस्था की है या कर रहे हैं।

सिंधः कराची तथा हैदराबाद (सिंध) में सात प्रमुख नियोक्ताओं ने अनाज की दुकानें खोली हैं, सभी आवश्यक सेवाओं के नियोक्ताओं के लिए यह अपेक्षित व आवश्यक कर दिया गया है कि वे काम के स्थल के परिसर के अंतर्गत खाद्य सामग्री का संकटकालीन भंडार रखें और उसे पकाने की व्यवस्था भी की जाए। प्रमुख/प्रसिद्ध नियोक्ताओं ने इसका पालन किया है।

कराची में एक प्रमुख उद्यम ने अपने कर्मचारियों को पकाया हुआ भोजन तथा दूध देने के लिए एक कैन्टीन स्थापित की है।