20 श्रमिकों की आर्थिक दशा सुधारने के उपाय - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ख) श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए उनका किस तरीके का प्रस्ताव है_ और

(ग) क्या वह श्रमिकों की यूनियनों का पुनर्गठन करने और उनको अपने हितों

की रक्षा करने की स्थिति में रखने के लिए तैयार हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) विधायी तथा कार्यकारी दोनों ही कार्रवाइयों में सरकार ने श्रमिकों की स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयत्न किया है। जब मेरी प्रेस से मुलाकात हुई, उस समय जारी किए गए प्रेस नोट की एक प्रति माननीय सदस्य की सूचना के लिए संलग्न है। इससे सुधारात्मक व्यवस्था का पता चलेगा। यदि किसी विश्ष्टि प्रश्न/बात के सम्बंध में माननीय सदस्य और अधिक सूचना चाहते हैं तो यह सूचना दी जाएगी।

(ख) इसका उत्तर (क) के अंतर्गत पहले ही दे दिया गया है।

(ग) श्रमिक संघों (यूनियनों) का पुनर्गठन करना सरकार का काम नहीं है।

* युद्ध के समय में भारत में श्रमिक कल्याण

अनेक सहायक श्रमिक कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति को देखते हुए जिनकी नियुक्ति शीघ्र ही महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में की जाएगी, हम इस बात का पता लगा सकते हैं कि युद्ध के समय में भारत में श्रमिकों की बेहतरी के लिए क्या किया जा रहा है। सरकारी नौकरी की पुरानी अवधारणा कि वह शासन करने के लिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए होती है, बदल गई है। उसके स्थान पर एक नया आदर्श आ गया है जिसमें लोगों की सामग्री, वस्तुओं के तथा उनकी संस्कृति सम्बंधी कल्याण व हित की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी मानी जाती है। भारत में श्रम मुख्यतः एक प्रांतीय विषय है और हम केन्द्र में अब तक श्रमिक संबंधी विधि निर्माण व कानून में मुख्यतः एकरूपता लाने के लिए और ऐसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय परम्पराओं के जो भारत के लिए व्यवहार्य हों, पालन के लिए उत्तरदायी रहे हैं। हमारा कानून यद्यपि व्यापक है, पर वह वेतन/मजदूरी तथा कल्याण जैसे मामलों की अपेक्षा सेवा शर्तों तथा औद्योगिक संबंधों जैसे मामलों तक अधिक सीमित रहा है।

युद्धकाल में श्रमिक के अधिकारों में कुछ कटौती उत्पादन को जारी रखने के लिए आवश्यक होती है, परन्तु उन आवश्यक कटौतियों को लागू करने की प्रक्रिया में ही, हम श्रमिकों को कुछ बड़े लाभ प्रदान कर सकें। इस प्रकार, आवश्यक सेवा अनुरक्षण अध्यादेश के अधीन कर्मचारियों को अपने काम पर डटे रहना चाहिए। इसके साथ ही यह अध्यादेश लोगों को आवश्यक उद्योगों में रोजगार की उत्तम शर्तों की गारंटी प्रदन करता है। तकनीकी कार्मिकों का सर्वोत्तम उपयोग हो, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी है, परन्तु यहां भी, कानूनी व्यवस्था उनकी सेवा की स्थिति व शर्तों को अच्छा बनाने को सुनिश्चित करती है। अतएव जब नोटिस के बिना, हड़तालों को भी अवैध व गैरकानूनी बना दिया गया है, तब न्याय निर्णय के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है और ऐसे न्याय-निर्णय के परिणामों को लागू करने के लिए शक्ति ले ली गई है।

* वही, प्रेस टिप्पणी, दिनांक 30 अक्तूबर, 1942 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा दिए गए वक्तव्य का सारांश