विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 35
इसलिए जहां श्रमिक पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं वहां सरकार की शक्तियों में कुछ विकास हुआ है जिससे रोजगार की अच्छी स्थिति सुनिश्चित होती है जिसका प्रभाव बने रहने की संभावना है।
दूसरा मामला जिसमें युद्ध के परिणामस्वरूप उत्पन्न बातों का स्थाई प्रभाव होना अवश्यंभावी है, वह श्रम विभाग की प्रशिक्षण योजनाएं तथा कुशल कर्मचारियों को आगे प्रशिक्षण के लिए इंग्लैंड में भेजने का नया प्रयोग है। बेविन लड़कों को जिनकी इंग्लैंड में प्रशिक्षण अवधि से भारतीय श्रमिकों को अंग्रेज श्रमिक वर्ग की स्थिति तथा संगठनों को देखने का अवसर मिला है, स्वयं भी इस प्रशिक्षण से इस हद तक लाभ हुआ है कि वे अब अपने पहले वेतन से औसतन अढ़ाई गुना अधिक कमाते हैं। भारत में अपरिपक्व या नौसीखिए व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने की योजना के अंतर्गत जून, 1943 तक 70,000 कुशल कर्मचारी प्रशिक्षित किए जाएंगे। इस प्रशिक्षण योजना के और अधिक अच्छे परिणाम होने चाहिए क्योंकि देश के कुशल श्रमिक बल में इतनी अधिक वृद्धि, भारत के युद्धोत्तर नवजागरण के लिए बहुत ही उपयोगी होनी चाहिए।
हम नवीन श्रमिक कल्याण संगठन को देखें तो इस भावना का सबसे अच्छा संकेत जो इस विभाग को सजीव बनाता है मेरे सहकर्मी माननीय सर फिरोज खां नून द्वारा किया गया। श्रमिक कल्याण सलाहकार का चयन है। श्री आर.एस. निम्बकार अपने तमाम जीवन भर श्रमिक नेता रहे हैं। श्रमिकों के हित के लिए वे लगातार जेल के अंदर या बाहर रहे हैं। भारत की सबसे बड़ी यूनियनों में से एक बम्बई गिरनी कामगार यूनियन के लिए उन्होंने जो काम किया उससे श्रमिकों के संगठनकर्त्ता के रूप में उनकी क्षमता का पता चला है, जबकि उन्होंने अपने गृह नगर तथा भारत की बम्बई नगरपालिका के सदस्य के रूप में तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में एक प्रतिनिधि के रूप में सेवा की है। इस सम्मेलन में वह सर फिरोज खां नून के नेतृत्व वाले दल के एक सदस्य के रूप में गए थे। हमारा सौभाग्य है कि वह अब सरकारी कर्मचारी हैं और आप यकीन रखें, हम उनकी सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएंगे। अब तक उनका काम इतना सफल रहा है कि हमने श्री निम्बेकार की सहायता के लिए अब सात सहायक श्रमिक कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की है। पिछले तीन या चार दिन से ये नये श्रमिक कल्याण अधिकारी, यहां दिल्ली में श्रम विभाग में अपने काम के सम्बंध में कुछ बातें सीखने के लिए रह रहे हैं। उन्हें (और एक आठवें अधिकारी को जो संभवतः शीघ्र ही कार्यभार संभाल लेगा) विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाएगा_ जहां पर यह आशा है कि वे केन्द्रीय सरकार की ओर से श्रमिकों के साथ सम्पर्क बनाकर रखेंगे। एक ओर उनका कर्त्तव्य केन्द्र सरकार को श्रमिकों की स्थिति तथा उनकी भावना तथा विशेष रूप से भारत के विभिन्न भागों में श्रमिकों की शिकायतों के सम्बंध में जानकारी देना और दूसरी ओर, श्रमिकों सम्बंधी मामलों में केन्द्र सरकार की नीति को श्रमिकों को समझाना होगा। ये अत्यधिक कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए ए.आर.पी. व्यवस्था बनाने में कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त करने में भी सहायता कर सकते हैं।
यह आशा है कि इन अधिकारियों के काम से केन्द्र सरकार ऐसे श्रमिक पहलुओं के निकट सम्पर्क में आएगी जो केन्द्र से सम्बंधित हैं (श्रम, वास्तव में, व्यापक रूप में, एक प्रांतीय विषय है) और ये सरकार की नीति में मुख्य घोषणाओं में से एक अर्थात् नियोक्ता, कर्मचारी तथा सरकार के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को विकसित करने में सहयोग देंगे। हमारा प्रथम त्रिपक्षीय सम्मेलन गत अगस्त में हुआ था µ उस सम्मेलन की स्थाई समिति की बैठक भविष्य में निरंतर होगी और इस समस्त देश में एक भली-भांति विकसित श्रमिक नीति का मार्गदर्शन करेगी।