23 भारतीय श्रमिक की सामूहिक बेरोज़गारी के विरूद्ध रोजगार की व्यवस्था करने के लिए योजना - Page 54

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 39

बाबू बैजनाथ बाजोरियाः प्रश्न के पैरा (क) के सम्बंध में माननीय सदस्य ने ‘‘नहीं’’ कहा है। क्या इसका अर्थ यह है कि अन्य आपूर्ति फर्मों को अभ्रक का भारत से निर्यात करने की अनुमति है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र को उसका उत्तर अगले प्रश्न में मिलेगा।

बाबू बैजनाथ बाजोरियाः परन्तु आप मेरे प्रश्न के भाग (क) के संबंध में पहले ही ‘‘नहीं’’ कह चुके हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ,

बाबू बैजनाथ बाजोरियाः उसका अभिप्राय यह है कि अन्य फर्मों को भारत से अभ्रक का निर्यात करने की अनुमति होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कोई प्रतिबंध नहीं है_ इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तें हैं।

बाबू बैजनाथ बाजोरियाः जहां तक (ग) का संबंध है, क्या माननीय सदस्य को यह जानकारी है कि संयुक्त अभ्रक मिशन ने गुणवत्ता के मानक को बढ़ा दिया है और उससे दर को घटा दिया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं। उसका उत्तर भी अगले प्रश्न में मिलेगा।

23

* भारतीय श्रमिक की सामूहिक बेरोज़गारी के विरूद्ध

रोजगार की व्यवस्था करने के लिए योजना ** 103. श्री गोविन्द वी. देशमुखः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या उन्होंने भारतीय श्रमिक की सामूहिक बेरोज़गारी के विरूद्ध रोजगार की व्यवस्था करने के लिए कोई योजना बनाई है ताकि वह जीवन की आवश्कयताओं की पूर्ति के अभाव से मुक्ति पा सके_ यदि हां तो वह क्या योजना है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सामूहिक बेरोज़गारी के विरूद्ध रोज़गार की व्यवस्था करने के लिए कोई औपचारिक योजना नहीं बनाई गई है।

युद्ध के समय में रोज़गार का क्षेत्र बहुत बढ़ गया है। जहां तक युद्ध के बाद की स्थितियों का संबंध है, वाणिज्य विभाग में नियुक्त पुनर्निर्माण समिति उनकी ओर ध्यान देगी।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 16 फरवरी, 1943, पृष्ठ 267-68 ** इस प्रश्न का उत्तर सदन के पटल पर रखा गया, क्योंकि प्रश्नकर्त्ता अनुपस्थित था।