24 संयुक्त राज्य अमरीका की मैटल रिज़र्व कम्पनी तथा संयुक्त अभ्रक मिशन को अभ्रक के निर्यात का एकाधिकार - Page 56

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 41

होता है और जिसे सामान्य मान्यताप्राप्त व्यापार मानकों के अनुसार सुव्यवस्थित तथा वर्गीकृत किया जाता है।

(ख) इस बात की कल्पना करने का सरकार से पास कोई कारण नहीं कि मिशन अपने आश्वासन व वचन का पालन नहीं कर रहा है।

(ग) मिशन अभ्रक की केवल अनुसूचित किस्में खरीद रहा है, संयुक्त राष्ट्र में कोई और किस्म विक्रय योग्य नहीं है। तथापि, ऐसी किस्मों का तटस्थ देशों में निर्यात किया जा सकता है, बशर्ते कि वे सरकार द्वारा जारी किए गए किसी सामान्य आदेश के प्रतिकूल न हो। मिशन अभ्रक की अनुसूचित किस्मों को खरीदने से कभी भी इंकार नहीं करता बशर्तें कि वे मिशन के मानकों के अनुसार हों। भारत सरकार को इस बात की जानकारी नहीं है कि अनुसूचित किस्म के अभ्रक की भारी मात्रा बिना बिक्री रह गई है।

(घ) संयुक्त अभ्रक मिशन द्वारा अभ्रक की जिन किस्मों को नहीं खरीदा गया है वे संयुक्त राष्ट्र में बिकने के योग्य नहीं हैं। तदनुसार, सरकार ऐसे भंडार को बेचने के लिए उद्योग की सहायता करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। ऐसे भंडार के तटस्थ देशों में विक्रय होने की असंभावित स्थिति में, सरकार को ऐसे भंडारों के निर्यात के लिए लाइसेंस जारी करने में कोई आपत्ति नहीं है बशर्ते कि वे सरकार द्वारा जारी किए गए सामान्य आदेशों के प्रतिकूल न हों।

(घ) प्राइवेट फर्मों द्वारा अभ्रक का निर्यात निषिद्ध नहीं है। संयुक्त राष्ट्र, तथापि, अभ्रक का आयात प्राइवेट फर्मों द्वारा नहीं करता, परन्तु अभ्रक का आयात केवल संयुक्त अभ्रक मिशन द्वारा खरीददारी से ही करेगा। संयुक्त राष्ट्र को उस समस्त विक्रेय अभ्रक की आवश्यकता है जिसे अभ्रक उद्योग भारत में उत्पन्न कर सके। संयुक्त राष्ट्र को अभ्रक की बिक्री को संयुक्त अभ्रक मिशन के द्वारा इसलिए सारणीबद्ध किया गया है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र तथा भारत सरकार का यह विचार है कि उसी स्थान पर खरीदने वाली एकाकी एजेंसी, अभ्रक को उसी भारी मात्रा में, संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता के अनुसार प्रदान करने के लिए शीघ्रतम तथा सरलतम साधन उपलब्ध कर सकती है।

(च) संयुक्त राष्ट्रों के पास अभ्रक विखंडित (स्पिलिटिंग) का अत्यधिक भंडार पहले ही है और उनकी मुख्य आवश्यकता अब ब्लॉक अभ्रक की है। फिर भी, मिशन सब अभ्रक लगातार खरीद रहा है जो खानों से विभाजित होकर आता है। तथापि, वे उस अभ्रक को नहीं खरीदेंगे जो पुराने ढेरों से अलग होता है और ऐसा अभ्रक संयुक्त राष्ट्रों में विक्रय नहीं होता। ऐसे अभ्रक को तथापि, तटस्थ देशों में बेचा जा सकता