विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 43
(घ) क्या सरकार एक सलाहकार समिति को नियुक्त करने के लिए तैयार हैं, जिसमें खानों के स्वामियों तथा फैक्ट्रियों के स्वामियों के प्रतिनिधि हों और यह समिति विभिन्न किस्मों, के मूल्यों को निर्धारित करने के प्रश्न पर संयुक्त अभ्रक मिशन को परामर्श दे_ और यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) अभ्रक के विभिन्न ग्रेड़ों का मूल्य निध ार्रित करने से पहले, संयुक्त अभ्रक मिशन ने अभ्रक उद्योग के साथ परामर्श किया है जिसमें बिहार तथा मद्रास दोनों में अलग-अलग फर्मों के प्रतिनिधि थे।
(ख) संयुक्त अभ्रक मिशन ने मानकों (स्टैंडर्ड्स) को बहुत अधिक नहीं बढ़ाया है। तथापि, इसने कुछ मामलों में मानकों को थोड़ा-सा बढ़ाया है, यद्यपि विभाजित (स्प्लिटिंग) तथा फिल्मों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। जहां कहीं भी मानक बढ़ाया गया है, वहीं मूल्यों को भी उसी अनुपात में बढ़ाया गया है। मिशन पूर्व के मानक तथा मूल्य को 100 मानकर, मिशन का मानक (स्टैंडर्ड) जहां बढ़ाया गया है वहां 105 है और मिशन का मूल्य 110 है। मैटल रिज़र्व कम्पनी जब भारतीय भूविज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक के माध्यम से खरीददारी कर रहा था तो उसके द्वारा मांगे गए मानक को क्षेत्र/पारस मिशन द्वारा अपेक्षित अनुसूचित मानकों के बहुत क्षेत्र/ परास की तुलना में कम था।
(ग) संयुक्त अभ्रक मिशन ने अपने क्रय-मूल्य को 10 से 30 प्रतिशत तक कम नहीं किया है।
(घ) प्रश्न नहीं उठता।
(घ) नहीं, मिश्न प्रस्तुत मूल्य, अभ्रक उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श करने के बाद तथा भारत सरकार के अनुमोदन से निश्चित किए गए। भारत सरकार के मत से वे अच्छे मूल्य हैं और भारत सरकार को एक सलाहकार समिति की नियुक्ति करने के लिए कोई औचित्य दिखाई नहीं देता।
बाबू बैजनाथ बाजोरियाः सरकार को एक ऐसी सलाहकार समिति को नियुक्त करने में क्या आपत्ति हो सकती है जिसमें अभ्रक की खानों के स्वामी तथा फैक्ट्रियों के प्रतिनिधि हों। इससे उनके हाथ तथा अभ्रक मिशन के हाथ आवश्यक अभ्रक
खरीदने के लिए मज़बूत होंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जैसा कि भाग (घ) में कहा गया है, इसका उत्तर यह है कि अभ्रक मिशन मूल्य का निर्धारण अभ्रक उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श करके करता है।
बाबू बैजनाथ बाजोरियाः मेरे विचार से यह उत्तर सही नहीं है।