44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* रेलवे कर्मचारियों को वेतन का
भुगतान करने में अनियमितताएं
109. श्री लालचंद नवलरायः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि 1936 का वेतन अधिनियम, IV, भारत के रेलवे पर कब लागू किया गया था_
(ख) क्या यह सच है कि कर्मचारियों के भुगतान में श्रम निरीक्षकों को कुछ अनियमितताएं दिखाई दी हैं_
(ग) क्या यह सच है कि समझौता अधिकारी (रेलवे) तथा रेलवे श्रमिक-पर्यवेक्षक जो अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षक होता है, साधारणतया, इन अनियमितताओं की रिपोर्ट संबंधित प्रशासन को भेजने का प्रयत्न करता है ताकि उन्हें कोई राहत दी जा सके_
(घ) क्या यह सच नहीं है कि विलम्ब से भुगतान के अनेक मामलों में प्रभावित कर्मचारियों को उस समय राहत दी जा सकती है जब वेतन अधिनियम के भुगतान के प्रावधानों का एक बार उल्लंघन कर दिया गया हो। क्या एक निवारक के रूप में कार्य करने के लिए ऐसे मामलों में मुकद्मा चलाया जाता है_ यदि नहीं, तो क्यों नहीं_ और
(घ) क्या रेलवे में वेतन का भुगतान करने वालों या प्रशासन के विरूद्ध कोई अभियोग चलाया गया है और यदि हां, तो क्या माननीय सदस्य ऐसे मामलों का विवरण सदन के पटल पर रखने का इरादा रखते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) 28 मार्च, 1937
(ख) हाँ।
(ग) पाई गई अनियमितताओं को सुधारने व ठीक करने के लिए रेलवे प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है।
(घ) अधिनियम की धारा 15(3) के अधीन राहत दी जा सकती है। परन्तु कोई अभियोग नहीं चलाया जाता, क्योंकि अब तक जितनी कमियों/दोषों का पता चला है, उनको प्रशासनिक कार्यवाही द्वारा हमेशा ठीक करना संभव हुआ है।
(घ) कोई अभियोग नहीं चलाया गया।
श्री लालचंद नवलरायः भुगतान विलम्ब से क्यों किए जाते हैं?
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 16 फरवरी, 1943, पृष्ठ 285