विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 49
(घ) तथा (घ) विधि के दंड प्रावधानों की सहायता/साधन का आह्नान आवश्यक नहीं हुआ क्योंकि अनियमितताओं को प्रशासनिक कार्यवाही द्वारा सुधारना हमेशा संभव हुआ है।
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* समझौता अधिकारी (रेलवे) के कार्यकलाप के क्षेत्र
147. श्री एन.एम. जोशीः (श्री लालचंद नवलराय की ओर से)ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि समझौता अधिकारी (रेलवे) के पद का सृजन होने के बाद, उसे रेलवे के समूह के बीच समझौता संबंधी कार्यकलाप चलाने के लिए कलकत्ता में नियुक्त किया गया और उसका मुख्यालय कलकत्ता में रखा गया_ और
(ख) क्या यह सच है कि समझौता अधिकारी (रेलवे) तथा रेलवे श्रम पर्यवेक्षक के कार्यालय को अब लाहौर स्थानांतरित कर दिया गया है और क्या उसके समझौता कार्यकलापों का क्षेत्र, रेलवे के समूह तक ही सीमित रहेगा और मुख्यालय कलकत्ता में ही रहेगा या लाहौर में उत्तर-पश्चिमी रेलवे से संबंधित होगा या लाहौर तथा कलकत्ता दोनों स्थानों पर मुख्यालय वाली रेलवे से संबंधित होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेउकरः (क) हाँ
(ख) समझौता अधिकारी (रेलवे) तथा रेलवे श्रम पर्यवेक्षक के मुख्यालयों को केवल मात्र अस्थायी व्यवस्था के रूप में स्थानांतरित किया गया था क्योंकि पद के लिए एक नए पदधारी की नियुक्ति की जा रही थी और रेलवे श्रम उप-पर्यवेक्षक जिसका मुख्यालय लाहोर में है, समझौता अधिकारी (रेलवे) तथा रेलवे पर्यवेक्षक के पद का अतिरिक्त प्रभार संभाले हुए था। पद पर नए पदधारी की नियुक्ति के बाद उसके मुख्यालय को अब फिर वापिस कलकत्ता में स्थानांतरित कर दिया गया है।
श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या सरकार समझौता अधिकारी के कार्य का विस्तार कलकत्ता मुख्यालय वाली रेलवे के अलावा अन्य रेलों तक ही करेगी?
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 19 फरवरी, 1943, पृष्ठ 421