विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 51
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) तथा (ख) शत्रु के द्वारा बमबारी में घायल व्यक्तियों तथा ऐसी कार्यवाही में मारे गए व्यक्तियों के आश्रितों को राहत देने की व्यवस्था, युद्ध आहत अध्यादेश के अंतर्गत सरकार द्वारा युद्ध आहत योजना में की गई है।
राहत के लिए आवेदन पत्र देना स्वाभाविक है परन्तु प्रक्रिया को यथासंभव बहुत तीव्र बना दिया गया है। जहां सबंधित व्यक्ति आवेदन पत्र देने में समर्थ नहीं होता वहां उसकी ओर से आवेदनपत्र को स्वीकारने तथा उस पर कार्यवाही करने की व्यवस्था भी कर दी गई है।
यह भी व्यवस्था की गई है कि मृत्यु या घायल होने की स्थिति में दी जाने वाली राशि के प्रति प्रत्येक मामले में नियोजकों द्वारा 50/- रुपये की राशि पेशगी के रूप में दे दी जाए।
युद्ध आहत अध्यादेश योजना तथा विनिमय वाली पुस्तिका की एक प्रति सदन के पुस्तकालय में रख दी गई है।
(ग) (i) तथा (ii) में प्रांतीय उत्तरदायित्व के मामले हैं। भारत सरकार के पास यह विस्तृत ब्यौरा नहीं है कि उन्होंने कार्य किस प्रकार किया। भारत सरकार द्वारा शवों को निपटाने, आहतों की चिकित्सा के लिए संगठनों के निर्माण के लिए पूरा परामर्श दिया गया है तथा संस्तुत रूपरेखा संबंधी योजना को वास्तव में लागू कर दिया गया है। प्रांतीय सरकारों ने भारत सरकार को सूचना दी है कि योजना में संतोषजनक रूप में कार्य हुआ है। उनकी कुशल कार्य प्रणाली के संबंध में कोई शिकायत या आलोचना भारत सरकार के सामने नहीं आई है। (iii) तथा (iv) इनके संबंध में भारत सरकार के पास कोई विस्तृत ब्यौरा या सूचना नहीं है। अब तक आक्रमण हल्के रहे हैं और भारत सरकार के पास जो सूचना है, उससे यह पता चलेगा कि बमबारी हुए क्षेत्र के मामले में, इस संबंध में कोई विशेष समस्या उत्पन्न नहीं हुई है। यह समझा जाता है कि युद्ध आहत योजना के अंतर्गत राहत अनेक मामलों में प्रदान की गई है और कुछ मामलों की जांच पड़ताल की जा रही है।
श्री एच.ए. साथर एच. इसाक सेटः क्या भाग (ख) के संबंध में मेरे माननीय मित्र संतुष्ट हैं कि विलम्ब के संबंध में वास्तव में कोई शिकायत नहीं हुई?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।