56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) तथा (ख) हाँ।
(ग) नहीं। किराया नियंत्रण आदेश एक ऐसे घर का ठीक किराया निर्धारित करने की तीव्र विधि प्रदान करता है, जिसके लिए पंजाब अधिनियम में व्यवस्था नहीं है और मुझे ऐसा कोई कारण दिखाई नहीं देता, जिससे इस आदेश को वापिस दिया जाए।
* शिमला में गृह किराया नियंत्रण
# 232. खान बहादुर शेख फ़ज़ेल हक़ पिराचाः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य को यह जानकारी है कि दिल्ली में सरकार के सिविल विभागों को रोके रखने के कारण शिमला में निजी सम्पत्तियों के किरायों में भारी कमी हुई थी और बहुत बड़ी संख्या में मकान खाली पड़े रहे थे या सम्बंधित भूस्वामियों ने, उस वर्ष के दौरान उन्हें नाममात्र के किराए पर पट्टे पर दे दिया था_ यदि हां तो क्या सरकार का उस वर्ष के लिए किराए को किराया नियंत्रण आदेश के अंतर्गत मूल किराया के रूप में निर्धारित न करने का प्रस्ताव है_
(ख) क्या माननीय सदस्य को यह जानकारी है कि मरम्मत की लागत बहुत अधिक हो गई है और पंजाब सरकार ने नए अधिनियम के अंतर्गत सम्पत्ति पर 7 ½ प्रतिशत का एक नया कर थोप दिया है_
(ग) क्या सरकार को मालूम है कि शिमला के मकान मालिकों को सम्बंधित सरकार द्वारा एक या दूसरे तरीके से प्रतिबंध थोपे जाने के कारण, आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है_
(घ) क्या माननीय सदस्य का शिमला के लिए गृह नियंत्रण आदेश में संशोधन करने का इरादा है ताकि 1939 के लिए किराए का निर्धारण बेसिक किराया तथा मरम्मत की बढ़ी हुई लागत/खर्च को 25 प्रतिशत के रूप में किया जा सके अथवा विकल्पतः किराया नियंत्रण आदेश को वापिस हटाना और उसके बदले पंजाब किराया प्रतिबंध अधिनियम को लागू करना चाहते हैं_ और यदि नहीं, तो क्यों नहीं? माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) 1940 के प्रारंभ मेंं किराए 1939 की अपेक्षा कम थे। 1939 में मकान मालिकों ने किरायों में अत्यधिक वृद्धि कर दी थी। तथापि, 1940 में मकान नाममात्र के किराए पर नहीं दिए गए थे और भारत सरकार ने यह विचार किया कि 1940 के किराए, किराया नियंत्रण आदेश के अंतर्गत बेसिक किराए मानने के लिए, ठीक किराए हैं।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 2 मार्च 1943, पृष्ठ 662 # प्रश्नकर्त्ता के अनुपस्थित होने के कारण इस प्रश्न का उत्तर सभा पटल पर रखा गया।