39 दिल्ली में सरकार द्वारा प्राइवेट घरों को पट्टे पर लेना - Page 74

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 59

(घ) इन भवनों के मालिकों को सरकार द्वारा किराये का भुगतान किस आधार पर किया जाता है, आबंटन के लिए मकानों का वर्गीकरण कैसे किया गया और उस वर्गीकरण के अनुसार उन्हें किस प्रकार आबंटित किया गया_

(घ) नीचे की टाइप के हकदार कितने लोगों को उच्चतर टाइप के मकान आबंटित किए गए, और क्यों_

(च) आबंटियों से इन मकानों के लिए किराया किस प्रकार वसूल किया जाता है_

(छ) क्या यह सच है कि यह उनके वेतन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता_

(ज) 1942-43 के दौरान, प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग, प्रथम तथा अंतिम मकानों पर कब्जा कब किया गया_

(झ) क्या यह सच है कि अनेक मकान अब भी खाली हैं_

(×ा) सरकार द्वारा मकान मालिकों को भुगतान की गई कुल राशि तथा किराएदारों से वसूल की गई राशि के अंतर से सरकार को कितनी हानि हुई_

(ट) मकानों के कई महीनों तक खाली पड़े रहने से सरकार को कितनी हानि हुई_

(ठ) क्या सरकार को संभावित मांग की जानकारी नहीं थी_

(घ) क्या यह सच है कि कुछ मामलों में मकान मालिकों को जितने किराए का भुगतान किया गया वह किराया उससे कहीं अधिक था जो उनके द्वारा सरकार को पट्टे पर देने से पहले वसूल किया जाता था और यदि हां तो क्यों, और इस क्षति के लिए कौन उत्तरदायी है और इसके लिए उत्तरदायी अधिकारियों के विरूद्ध सरकार क्या कार्रवाई करने का इरादा रखती है_

(ढ) अगले वर्ष के लिए सरकार का क्या करने का प्रस्ताव है_

(ण) क्या उन्हें पट्टे पर अभी और मकान लेने की आवश्यकता पड़ेगी या वे उनमें से कुछ को मुक्त करेंगे जो पहले से पट्टे पर लिए हुए हैं_

(त) क्या सरकार विगत समय में मकानों को पट्टे पर लेने के मामले की जांच करने के लिए एक जांच समिति बनाने के लिए तैयार है, जिससे कोई संदेह न रहे कि सरकार को अधिकारियों की लापरवाही तथा समाचारों के समुचित आकलन के अभाव में अनावश्यक हानि उठानी पड़ी?