39 दिल्ली में सरकार द्वारा प्राइवेट घरों को पट्टे पर लेना - Page 75

60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) तथा (ख) मांगी गई सूचना का विवरण सभा पटल पर रख दिया है।

(ग) नहीं। सर्दी के मौसम के आरंभ होने के बाद छियालीस (46) मकान पट्टे पर लिए गए।

(घ) सरकार ने ‘‘अच्छा किराया’’ अदा किया है जैसा कि नई दिल्ली किराया नियंत्रण आदेश, 1939 के प्रावधान के अंतर्गत निर्धारित किया गया है। आबंटन के लिए उपयुक्त आवासों में फलैटों का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया कि वे जो पत्नी तथा परिवारों वाले अधिकारियों के लिए उपयुक्त थे, और वे जो केवल पत्नी वाले अधिकारियों के लिए उपयुक्त थे और उनका आवंटन तदनुसार सिद्धांत के अनुसार किया गया कि ऊंचे किराए वाले मकान अधिक वेतन वाले अधिकारियों को आवंटित किए गए। लिपिकों (क्लर्कों) के लिए उपयुक्त मकानों का आबंटन उपर्युक्त सिद्धांत के अनुसार नहीं किया गया।

(घ) कोई नहीं। मकानों को टाइपों में विभाजित नहीं किया गया, परन्तु ‘‘अधिक किराए वाला आवास, अधिक वेतन वाले अधिकारी के लिए’’ सिद्धांत का उपलब्ध मकानों के आवंटन में हमेशा पालन किया गया।

(च) किराए का हिसाब नियमों के अनुसार किया जाता है और उसकी वसूली आवंटी से उसके वेतन का दस प्रतिशत या पूरे किराये की वसूली, जो भी कम हो, की जाती है।

(छ) हाँ, वेतन नहीं, परिलब्धियों का दस प्रतिशत।

(ज) (झ) तथा (×ा) मांगी गई सूचना तत्काल नहीं है और इस सूचना को एकत्रित करने में समय तथा श्रम लगेगा, वह युद्ध काल में न्यायसंगत नहीं होगा। यह असंभव है कि इतनी बड़ी आवास सम्पदा में, सभी मकान हमेशा भरे रहेंµ मकानों में कभी-कभी खाली रहने और दस प्रतिशत के नियम के लागू होने के कारण कुछ हानि अवश्यंभावी है।

(ट) नई दिल्ली तथा दरियागंज में पट्टे पर लिया गया कोई भी मकान खाली नहीं है और अधिकारियों के लिए उपयुक्त आवास के चार सूट तथा लिपिकों के लिए उपयुक्त आवास के तीन सूट करोल बाग में खाली हैं।

(ठ) सरकार को पूरी जानकारी थी।

(ड) किरायों का भुगतान किया गया वे किराया नियंत्रक द्वारा निर्धारित किए गए थे, जहां तक मालूम है उन मामलों में जहां पर मकान पहले पट्टे पर लिए गए थे, उनका किराया पहले भुगतान किए गए किराए से अधिक नहीं था। प्रश्न के बाद वाले भाग का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं।