विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 65
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं। प्रश्न के आखिरी भाग का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं।
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* नई दिल्ली में बहुत पुरने ‘डी’ टाइप क्वार्टरों में सुधार
283. सरदार संत सिंहः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि 1940 में डी.आई.जैड एरिया, नई दिल्ली में बहुत पुराने ‘डी’ टाइप र्क्वाटरों की गैलरियों को जब कवर किया गया तब एक सुझाव दिया गया था कि गैलरी के दोनों ओर दो कमरों की दीवारों में लगाए गए रोशनदान शीशे के केस वाले होने चाहिए ताकि उन्हें बंद किया जा सके_
(ख) क्या यह सच है कि पुरानी किस्म के शीशे के केस वाले रोश्नदानों के बजाए केवल बड़े छेदों वाले वायर गेज़ रोशदान ही इस आधार पर प्रदान किए गए थे क्योंकि नई दिल्ली के स्वास्थ्य अधिकारी ने बाद वाली किस्म के रोशनदानों की व्यवस्था पर आपत्ति की थी क्योंकि वे अस्वास्थ्यकर थे_
(ग) क्या यह सच है कि यह प्रस्ताव रखा गया था कि इन क्वार्टरों में शौचालय तथा स्नानागार के बीच खुले स्थान कवर कर दिया जाए ताकि ईंधन आदि के भंडारण के लिए साथ मिल जाए_ और
(घ) क्या यह सच है कि इसे कवर करने पर भी स्वास्थ्य विभाग, नई दिल्ली ने आपत्ति की थी?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।
(ख) नहीं।
(ग) हाँ
(घ) नहीं।
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः सरदार संत सिंह के अन्य प्रश्नों के उत्तर सभा पटल पर रख दिए जाएंगे।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 11 मार्च, 1943, पृष्ठ 970