78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
56
* भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली के मशीन विभाग में उजरती
कारीगरों व कर्मचारियों की शिकायत
340. काज़ी मुहम्मद अहमद काज़मीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि भारत सरकार के मुद्रणालय, नई दिल्ली के मशीन विभाग में अनेक लोग ऐसे हैं जो उजरती कार्य में लगे हुए हैं और अनेक वेतन पर लगे हैं_
(ख) क्या यह सच है कि समस्त उजरती कारीगरों व कर्मचारियों को काम समान मात्रा में नहीं दिया जाता, जिसके फलस्वरूप कुछ को दूसरों की अपेक्षा अधिक पारिश्रमिक मिलता है_
(ग) क्या यह सच है कि काम के आवंटन में अधिकारी कुछ लोगों के प्रति पक्षपात तथा भेदभाव इस प्रकार दर्शाते हैं कि पारिश्रमिक का बहुत ही असमान वितरण होता है और उजरती कारीगरों व कर्मचारियों की एक बड़ी संख्या को मिलने वाले पारिश्रमिक की राशि इतनी कम होती है कि वह उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा उनके परिवारों के रखरखाव के लिए पर्याप्त नहीं होती, और
(घ) क्या सरकार का इरादा सब को काम देने की वांछनीयता पर विचार करने का है ताकि महीने के अंत में सबको वेतन की समान राशि मिले और इस प्रकार उनकी शिकायत दूर हो?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ।
(ख) प्रथम भाग का उत्तर ‘ना’ में है। दूसरे भाग का उत्तर देने का प्रश्न नहीं उठता।
(ग) नहीं।
(घ) यह वास्तव में किया जाता है, परन्तु काम से समान वेतन सुनिश्चित नहीं होता। माननीय सदस्य का ध्यान इस सदन में 17 फरवरी, 1941 के तारांकित प्रश्न सं. 85 के भाग (ग) के उत्तर की ओर आकर्षित किया जाता है।
काज़ी मुहम्मद काज़मीः क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या माननीय सदस्य ने इस आरोप की जांच की है कि इस समय काम के वास्तविक वितरण से उस काम में लगे व्यक्तियों को समान वेतन नहीं मिलता?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उत्तर जांच पर ही आधारित है।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 20 मार्च, 1943, पृष्ठ 1270