92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽसरकारी मुद्रणालय, दिल्ली में जूनियर कॉपी
होल्डरों को हानि
- मौलाना जफर अली खां ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली के कई कनिष्ठ रीडरों को अपने कॉपी होल्डर के पद से पदोन्नति पाकर कनिष्ठ रीडर के पद पर आने पर दस रु. या पांच रु. प्रतिमाह की हानि होती है और संशोधकों (कॉपी होल्डर) की वार्षिक वेतन वृद्धि पांच रु. है जबकि कनिष्ठ रीडरों की प्रतिवर्ष 3 रु. वेतन- वृद्धि मिलती है_
(ख) सरकार ऐसे क्या कदम उठा रही है कि कॉपी होल्डर और कनिष्ठ रीडर की वर्तमान दरों में असमानता को दूर किया जाए और उनकी आर्थिक हानि को पूरा किया जाए_
(ग) क्या यह सच है कि जुलाई, 1945 में स्वीकृत कॉपी होल्डरों के वेतन के समेकित वेतनमानों की बकाया राशि अभी तक अदा नही की गई है जबकि व्यक्तिगत रूप से उनके कई प्रतिवेदन प्राप्त हो चुके हैं_ और
(घ) इसके क्या कारण हैं और क्या सरकार यह प्रस्ताव करती है कि मजदूरी संदाय अधिनियम के अंतर्गत जो देर हुई है क्या उसके लिए कोई प्रतिकर दिया जाएगा, यदि नहीं, तो क्यों नही?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां। उन कॉपी होल्डरों के मामले में जो समेकित वेतनमान चाहते हैं और जो बाद में कनिष्ठ रीडर के पद पर पदोन्नति पा गए।
(ख) यह प्रश्न विचाराधीन है।
(ग) जी हां।
(घ) यद्यपि यह आदेश जुलाई, 1945 में जारी किया गया था फिर भी यह आदेश पूर्व तिथि अर्थात 1 सितम्बर, 1944 से प्रभावी हुआ। संबंधित कर्मचारियों को समेकित वेतनमान का चयन करने के लिए समय दिया गया। तत्पश्चात् उन कर्मचारियों का वेतन निर्धारित किया जाना था जिन्होने इस वेतनमान को स्वीकार किया था और उनमें से प्रत्येक कर्मचारी को तीन वर्ष की अवधि तक गत सेवा का लाभ दिया गया। लेखा प्राधिकारी इन बिलों की पूर्व लेखा-परीक्षा कर रहे हैं। शीघ्र ही भुगतान किया जाएगा। इस प्रश्न के अंतिम भाग का उत्तर ‘ना’ में है।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 3, 1946, 6 मार्च, 1946, पृष्ठ 1952