विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 111
(ख) ठेकेदारों को भवन निर्माण, बालू लादने और उसे उतारने, ईटें बनाने आदि के कार्यों पर लगाया जाता है तथा कुछ महिलाओं को भूमिगत स्थलों पर काम करने से अलग किया जाता है क्योंकि ऐसे स्थलों पर काम करने का भार ठेके पर दिया जाता है।
(ग) इस प्रकार काम पर लगाई गई महिलाओं की आय प्रतिदिन 10 से 12 आने होती है और इसमें आधा सेर निःशुल्क चावल तथा प्रत्येक उपस्थिति पर दो आने का बोनस सम्मिलित नहीं है।
(घ) अतिरिक्त राशन की रियायत केवल कोयला खान के कामगारों को दी जाती है।
कोयला खानों में भूमिगत स्थलों में कार्य करने वाली महिला कामगारों को दूध की निःशुल्क सप्लाई की रियायत उनके भूमिगत स्थलों में रोजगार के प्रतिबंध के हटाने के संबंध में एक प्रतिकर साधन था। 1 फरवरी, 1946 से प्रतिबंध के फिर से लगाए जाने के फलस्वरूप उस तारीख से यह रियायत लागू होने से समाप्त हो गई है।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः चावल और दाल की खरीद की रियायत के प्रश्न के संबंध में उन महिलाओं के बारे में इसे जारी क्यों नही होना चाहिए जो अब सतह पर काम करने के लिए है परन्तु जिन्होने इससे पूर्व भूमिगत स्थलों में काम किया था?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जैसा कि मैने अपने उत्तर में कहा है, वे विशेषधिकार दिए गए जब वे भूमिगत स्थलों में काम कर रहे थे। जैसे ही प्रतिबंध फिर से लगाया गया, उन्हें यह प्रतिकर भत्ता दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः माननीय सदस्य के सचिव उस दिन बता रहे थे कि कुछ रक्षात्मक साधन अपनाए गए थे ताकि मजदूरों को ठेकेदारों के अत्याचारों से बचाया जा सके। क्या हमें यह समझना है कि उनका शोषण किया जाता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं नहीं समझता कि यह किसने कहा।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः माननीय सदस्य के सचिव श्री जोशी ने बताया कि ठेकेदारों को यहां बुलाया जाता है और इन्हीं ठेकेदारों के द्वारा महिलाओं को काम पर लगाया जाता है। क्या हम यह समझें कि सरकार द्वारा पर्याप्त साधन अपनाए जाते हैं ताकि इन महिलाओं को उन ठेकेदारों के शोषण से बचाया जा सके?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं यही कह सकता हूं कि माननीय सदस्य कोई विशेष प्रश्न करेंगे तो मैं उस प्रश्न का उत्तर दूंगा।