120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रो एन. जी. रंगा ः क्या यह सच नहीं है कि श्रम के बारे में रायल आयोग ठेकेदारों की पद्धति के विरूद्ध अधिक कठोरता से रिपोर्ट की है। क्या माननीय सदस्य ऐसी कुछ पद्धति निकाल सकेंगे ताकि ठेकेदारों के अत्याचारों पर नियंत्रण किया जा सके? क्या सरकार इन महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का कोई साधन अपना सकती है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मुझे आशा है कि हम उस मामले की निपटाने में समर्थ होंगे।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः क्या माननीय सदस्य इस मामले को कोयला आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना चाहेंगे क्योंकि आयोग भारत की यात्रा करने वाला है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं नहीं जानता कि मैं ऐसा कर सकता हूं। मैं संबंधित विभाग के समक्ष यह मामला प्रस्तुत कर सकता हूं।
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ऽकेन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों
से संबंधित ठेकेदारों पर प्रतिबंध
1143. श्री सत्य नारायण सिन्हा ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग में इस आशय के आदेश दे दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों के ठेके किसी भी ठेकेदार को नहीं दिए जाने चाहिए जो विभाग के किसी अधिकारी के नजदीकी रिश्तेदार हैं_
(ख) क्या यह सच है कि नजदीकी रिश्तेदारों में चचेरे, ममेरे और मौसेरे भाई, बहनोई और साले आदि सम्मिलित किए जाते हैं और यह आदेश मुख्य लिपिकों, लिपिकों, ड्राफट्समैन, सर्वेयर आदि पर लागू होता है_
(ग) यह आदेश क्यों जारी किया गया है और इस आदेश के फलस्वरूप कितने ठेकेदारों को ठेके नही दिए गए_
(घ) क्या प्रांतों में लोक निर्माण विभागों अथवा अन्य देशों या विभागों यथा सैन्य इंजीनियरी सेवा, रेलवे, म्यूनिसिपल अथवा भारत के जिला बोडों के कार्य में इस प्रकार का कोई नियम है_
(घ) क्या भारत सरकार के निदेशों के अन्तर्गत अथवा केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के मुख्य इंजीनियर की अपनी पहल पर आदेश जारी किया गया था_ और
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 21 मार्च, 1946, पृष्ठ 2700