128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) उनकी नए रोजगार की आप की तुलना उस आय से किस प्रकार की जाती है जब वे भूमिगत स्थलों में काम कर रही थीं_
(घ) मजदूरी के अलावा वे अन्य रियायतें क्या हैं जो उन्हे भूमिगत स्थलों में काम करने की समाप्ति के फलस्वरूप खो देनी पड़ीं_ और
(च) सरकार ऐसे कौन कौन से उपाय करने का प्रस्ताव करती है ताकि उनकी आय और अन्य रियायतो की हानि की प्रतिपूर्ति की जाए?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) लगभग 20,000
(ख) वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं परन्तु (क) में उल्लिखित लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को प्रतिबंध लगाने के समय से वैकल्पिक रोजगार दिया जा चुका है। शेष 50 प्रतिशत महिलाएं अपने गांव वापस चली गई हैं जबकि कुछ महिलाएं
खानों में बेकार बैठी हुई हैं क्योंकि वे ठेके के कार्य यथा कोयले की भराई के काम को करने से इनकार करती हैं।
(ग) सतह पर कोयले की लदान, बालू की लदान और उसे उतारना तथा खानों में व्यर्थ की वस्तुओं का हटाना।
(घ) इस प्रकार काम पर लगाई गई महिलाओं की आय प्रतिदिन दस से बारह आने (प्रत्येक महिला को आधा सेर निःशुल्क चावल और दो आने का बोनस छोड़कर) थी जब कि भूमिगत स्थलों में काम करने वाली महिलाओं की प्रतिदिन आय बारह से चौदह आने थी।
(घ) इस प्रकार काम पर लगाई गई महिलाओं को निःशुल्क दूध नहीं दिया जाता जो उन्हें भूमिगत स्थलों में काम करने के कारण दिया जाता था।
(च) माननीय सदस्य का ध्यान 25 फरवरी, 1946 को पूछे गए तारांकित प्रश्न 466 के भाग (ख) के उत्तर की ओर आकर्षित किया जाता है।
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ऽदिल्ली में किराया नियंत्रण आदेशों में संशोधन
1239. पंडित ठाकुरदास भार्गव ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या यह सच है कि जनवरी, 1944 से पूर्व दिल्ली में किराया नियंत्रण आदेशों में मकान मालिकों को यह अनुमति दी गई थी कि वे अपने घर खाली करा सकते हैं यदि उन्हें उपयोग के लिए घर की आवश्यकता है_
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 27 मार्च, 1946, पृष्ठ 2964