424 दिल्ली में किराया नियंत्रण आदेशों में संशोधन - Page 144

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 129

(ख) क्या यह सच है कि ऊपर बताए गए आदेश जनवरी, 1944 में संशोधित किए गए थे और संशोधित आदेश में दिल्ली के रहने वाले मकान मालिकों को किरएदारों को बेदखल कराने से अलग कर दिया था चाहे उन्हें अपने उपयोग के लिए ही घर की आवश्यकता क्यों न हो_ यदि हां तो इसके क्या कारण हैं_

(ग) क्या माननीय सदस्य का ध्यान मकान मालिक के उस पत्र की ओर आकर्षित किया गया है जो 22 दिसंबर, 1945 के हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुआ है_

(घ) क्या सरकार को अपने उपयोग के लिए किराएदार से अपना घर खाली कराने के औचित्य पर विचार करेगी_ और

(घ) क्या यह सच है कि दिल्ली में पहले की अपेक्षा घर की उपलब्धता में कुछ सरलता है और सरकार ने बाद में यह निर्णय लिया है कि युद्ध के दौरान अस्थायी रूप से बनाई गई सरकारी इमारत को तोड़ दिया जाए?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां, नई दिल्ली मकान किराया नियंत्रण आदेश, 1939 के अधीन मकान-मालिक किराएदार को बेदखल करा सकता है यदि किराया नियंत्रक इस बात से संतुष्ट हो जाए कि घर समुचित रूप से और सदभाव से मकान मालिक के लिए आवश्यक है।

(ख) जी हां, नई दिल्ली मकान किराया नियंत्रण आदेश, 1939 के पुराने वाक्य

खंड में शब्द ‘युक्ति युक्त और सदभाव’ ने मकान-मालिकों को अनैतिक अवसर प्रदान किया कि वे किराएदारों से नियंत्रित किरायों से अधिक किराए देने के लिए ज़ोर डालने लगे। यह आवश्यक समझा गया कि मकान मालिकों को अधिक समय से रहने वाले किरायेदारों (जिनकी उपस्थिति दिल्ली के लिए आवश्यक थी) को घर खाली करने से रोक दिया गया, विशेष रूप से जब मकान मालिक पहले ही से दिल्ली में रह रहे थे। इसके फलस्वरूप नई दिल्ली मकान किराया नियंत्रण आदेश, 1939 में वाक्य खंड 11-ए को शामिल कर लिया गया।

(ग) जी हां।

(घ) नहीं, जब तक दिल्ली में आवास की स्थिति में सुधार नही होता।

(घ) प्रश्न के प्रथम अर्द्ध भाग का उत्तर नकारात्मक है।

सरकार का प्रस्ताव है कि इमारतों को तभी तोड़ा जाए जब किसी आवश्यक प्रयोजन के लिए उनकी आवश्यकता न हो अथवा जब आवास की स्थिति के हित में आवश्यक समझा जाए तो अस्थायी संरचनाओं के स्थान पर स्थायी इमारतें बनाई जा सकती हैं।