130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री मनु सूबेदार ः क्या मैं पूछ सकता हूं कि क्या सरकार इस प्रश्न के बारे में विचार करेगी, जब किराएदार किसी उप-किराएदार को मकान किराए पर उठाता है तो क्या तब भी सरकार मकान के किराएदार की सुरक्षा करेगी यदि किराएदार लाभ कमा रहा हो?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं इस प्रश्न पर विचार करूंगा।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः हम इन अस्थायी सरकारी इमारतों के तोड़ने के पक्ष में नही हैं। क्या इन मकानों के मालिक अथवा सरकार स्वयं उनके तोड़ने के लिए तैयार है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं यह प्रश्न समझ नहीं पाया।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः इस प्रश्न के भाग (क) में कहा गया है, फ्क्या यह सच है कि दिल्ली में पहले की अपेक्षा मकान की स्थिति अधिक सरल हो गई है और इसके फलस्वरूप सरकार ने यह निर्णय किया है कि युद्ध के दौरान निर्मित अस्थायी सरकारी इमारतों को तोड़ दिया जाए?य्
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैने यह नहीं कहा कि सरकार ने यह निर्णय किया है। मैने कहा कि सरकार अस्थायी इमारतों को तब तक नहीं तोड़ेगी जब तक उसे यह ज्ञात न हो कि वे इमारतें आवश्यक प्रयोजन के लिए आवश्यक नहीं है।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः क्या सरकार इन इमारतों को उस स्थानीय जनता को आवंटित करने के औचित्य पर विचार कर रही है जिन्हें आवास की आवश्यकता है जैसे ही उन इमारतों का सरकारी उपयोग समाप्त हो जाता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः यदि वे इमारतें सरकारी प्रयोजनों के लिए आवश्यक नहीं है और जनता उन इमारतों को किराए पर लेने के लिए तैयार है तो सरकार इस बारे में विचार करना चाहेगी।
सर मोहम्मद यामीन खां ः यह किराया नियंत्रण अध्यादेश, जून 1944 कब तक लागू रहेगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मेरे माननीय मित्र जानते हैं कि यह उस समय तक लागू रहेगा जब तक कि आपात-कालीन स्थिति बनी रहती है।
सभापति महोदय ः अगला प्रश्न किया जाए।