425 दिल्ली में ईंटों के नियंत्रण आदेश की समाप्ति - Page 146

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 131

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ऽदिल्ली में ईंटों के नियंत्रण आदेश की समाप्ति

1242. श्री एम. अनन्तशायनम अय्यंगर ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या माननीय सदस्य का ध्यान 3 मार्च, 1946 को प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स के उस समाचार की ओर आकर्षित किया गया है जिसका संबंध ईंटों की संशोधित कीमतों से है_

(ख) क्या माननीय सदस्य इस तथ्य से अवगत हैं कि माननीय वित्त मंत्री ने अपने बजट-भाषण में यथासंभव शीघ्रता के साथ आवास के लिए इमारतों के निर्माण तथा इस संबंध में सभी नियंत्रित वस्तुओं को देने की आवश्यकता के बारे में कहा है_

(ग) अभी तक ईंटों की बिक्री पर नियंत्रण क्यों है और इस बात की आवश्यकता क्यों है कि युद्ध समाप्त होने के बाद काफी समय से दिल्ली में ईंटों की खरीद के लिए परमिट दिए जाते हैं_ और

(घ) क्या माननीय सदस्य इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व अपने विभाग के सभी नियंत्रण समाप्त करने की वांछनीयता पर विचार करेंगे अर्थात् 1 अप्रैल, 1946 तक दिल्ली और नई दिल्ली की अधिक बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए अतिरिक्त आवास गृहों की तात्कालिक आवश्यकता की दृष्टि से विचार करेंगे, यदि नहीं तो क्यों नहीं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां।

(ख) जी हां।

(ग) और (घ) कीमत पर नियंत्रण और वितरण पर नियंत्रण यह सुनिश्चित करने के लिए जारी रखा गया कि ईंटों की कीमत एक उचित स्तर तक बनी रहे और सरकारी तथा निजी स्टाक से व्यवस्थित रूप मेंं ईटों का निपटान किया जाए। फिर भी इस पूरे मामले पर अधिक विचार किया जा रहा है।

प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः क्या माननीय सदस्य इस बात के लिए उत्तरदायी नहीं है कि वह केन्द्र शासित क्षेत्रों में घरों के निर्माण और अन्य सभी बातों को देखें और यदि हां तो क्या माननीय सदस्य अन्य नगरों में केन्द्र शासित क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के विचार को कार्यान्वित करेंगे?

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 27 मार्च, 1946, पृष्ठ 2967