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138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन विनियमों के अन्तर्गत स्कूल ऑफ माइन्स के डिप्लोमा को कुछ महत्व दिया जाए परन्तु सरकार इस बात पर विचार नहीं करती कि यह संभव है कि उस डिप्लोमा को उन विनियमों के अन्तर्गत द्वितीय श्रेणी के खान प्रबंधक प्रमाणपत्र के स्थान पर समान समझा जाए।

प्रो एन. जी. रंगा ः जब सरकार प्रमाण-पत्र और डिप्लोमा दोनो के लिए उत्तरदायी है तब भारत सरकार के लिए ऐसा क्या प्रतिबंध है कि सरकार डिप्लोमा धारकों को वह प्रशिक्षण क्यों नहीं दे पाती जो प्रशिक्षण अथवा दक्षता की दृष्टि से समान समझा जाएगा जैसा कि प्रमाण-पत्र से ऐसे प्रशिक्षण की अपेक्षा की जाती है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैने इस विषय की जाँच-पड़ताल में यह पाया है कि इसमें कुछ असमानताएं हैं और मैं उन्हें सुधारने की दिशा में उपाय कर रहा हूं।

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ऽयूनाइटेड स्टेट्स आर्मी चेपल, नई दिल्ली

1268. श्री एस. सी. आदित्य ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि अमरीकी सेना गिरजाघर के बारे में यह प्रस्ताव है कि उस धर्म-निरपेक्ष प्रयोजनों के लिए बदल दिया जाए_

(ख) उन आवेदकों के नाम क्या-क्या है जिन्होंने इस गिरजाघर को खरीदने के प्रस्ताव दिए हैं_ और

(ग) क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि इससे अधिकांश ईसाइयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस लगेगी यदि गिरजाघर को ईसाई-धर्म की पूजा के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए बदला जाए?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) यह मामला विचाराधीन है।

(ख) सरकार को अभी तक इस गिरजाघर की खरीद के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

(ग) यह समझा जाता है कि इस गिरजाघर को समर्पित नहीं किया गया है और इसका उपयोग ईसाई की पूजा के सिवाय किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं है अतः इससे अधिकांश ईसाइयों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 27 मार्च, 1946, पृष्ठ 2985