146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं दी गई है जिसका आधार यह है कि वे दिल्ली/शिमला के अलावा किसी अन्य स्टेशन पर भेजे गए थे और ऐसे मामलों में सरकारी आवास-गृह पाने के लिए उनकी सेवाएं उन तारीख से गिनी गई जब वे दुबारा दिल्ली लौटकर आए_
(ग) क्या यह सच है कि कलकत्ता में कार्य करने वाले कर्मचारियों की आवास-गृह के आवंटन के संबंध में सभी कार्यालयों में काम करने की अवधि जोड़ी गई है_
(घ) यदि हां तो सचिवालय के कर्मचारियों और सम्बद्ध कार्यालयों के कर्मचारियों के बीच आवासीय गृह के आवंटन में अंतर क्यों किया गया है_
(घ) क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि क्वार्टरों के आवंटन के मामलों में इन लोगों को उनकी किसी भूल के न होते हुए सज़ा दी गई है क्योंकि वे श्रम विभाग के आदेश के अनुसार लोक हित में स्थानान्तरित किए गए हैं_ और
(च) क्या सरकार इस वांछनीयता पर विचार करने का प्रस्ताव करती है कि इन व्यत्तिQयों के संबंध में आस्थगित आधारों को पुनः स्थापित किया जाए और उन्हें दिल्ली/शिमला में कार्यालयों में काम प्रारंभ करने की तारीख से आवास-गृह आवंटित किये जाऐं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां।
(ख) सही स्थिति इस प्रकार हैः कुछ कर्मचारियों को उनकी पुरानी सेवा की गणना कराने की अनुमति दी गई थी दिल्ली से अनुपस्थित रहने की अवधि एक वर्ष से अधिक थी और उन्हें दिल्ली में आवास-गृह के बारे में धारणाधिकार प्राप्त है। इस अर्हक अवधि को बाद में अधिकतम छः महीने तक कम कर दिया गया था।
(ग) जी हां, परन्तु 1 अप्रैल, 1945 से पूर्व कलकत्ता के सचिवालय विभाग में तैनात कर्मचारी अथवा दिल्ली/शिमला के सचिवालय विभाग से कलकत्ता स्थित सचिवालय विभाग को स्थानान्तरित किया गया।
(घ) सचिवालय और सम्बद्ध कार्यालयों के कर्मचारियों के बीच कोई भी भेदभाव नहीं रखा गया किन्तु इसका अपवाद कलकत्ता कार्यालय है जहां भारत सरकार के विभाग की शाखा सचिवालय स्थित है और मुसलमान तथा शाखा सचिवालय के बीच स्थानान्तरण प्रायः किए गए। संशोधित नियमों के जारी होने के साथ यह रियायत 1 अप्रैल, 1945 से हटा ली गई है और इस तारीख के बाद कलकत्ता स्थित सचिवालय विभाग को स्थानान्तरित व्यक्तियों को दिल्ली में आवटन के लिए अपनी पुरानी सेवा की गणना कराने की अनुमति नही है।