विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 3
(ग) क्या यह सच है कि मृत परियोजना कामगारों के आश्रितों को जहां कहीं भी मुआवजा दिया गया है, वह राशि 200 रु. से 300 रुपए की राशि है? क्या यह राशि पर्याप्त समझी जाती है_
(घ) क्या माननीय सदस्य इस तथ्य से अवगत हैं कि इन अभागे मजदूरों के आश्रितों को मुआवजे की राशि प्राप्त करने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है_
(घ) क्या माननीय सदस्य यह प्रस्ताव करना चाहेंगे कि परियोजनाओं में लगे मजदूरों की मौत हो जाने पर उनमें आश्रितों को पर्याप्त मुआवजे की राशि अदा की जाए_ और
(च) क्या वह इस वांछनीयता पर भी प्रस्ताव करना चाहेंगे कि चाय बागान कार्यालय के बजाय सब डिवीज़नल कार्यालय द्वारा मुआवजे की राशि अदा की जाए?
माननीय डा. बी. आर. अम्बेडकरः (क) जी, हां।
(ख) यह सूचना सही नही है। भारत सरकार ने अपने युद्ध विभाग में उन सभी मजदूरों को मुआवजे के भुगतान करने के लिए निर्देश दिए हैं जिन्हें इंडियन टी एसोसियेशन (कुछ अन्य वर्गों के मजदूरों को छोड़कर) ने भर्ती किया था और जो असम में युद्ध परियोजनाओं में अपने रोजगार के फलस्वरूप प्राण गवां बैठे अथवा घायल हो गए। प्रवासी श्रमिकों के नियंत्रक ने श्रमिकों के दावों के समाधान के लिए कामगार मुआवजा आयुत्तQ की नियुत्तिQ की है। उन्होने गत दो वर्ष में 4000 से अधिक मामलों में मुआवजा अदा किया है। उन्हे इंडियन टी एसोसिएशन के मजदूरों की ओर से 28 फरवरी, 1945 तक मुआवजे के लिए 2,612 आवेदन पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 2, 309 मामलों में मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। इनमें से 217 मामले रद्द कर दिए गए हैं और अभी 86 मामलों की जाँच-पड़ताल की जा रही है।
(ग) ऐसे सभी मामलों में, जो कामगार मुआवजा अधिनियम के कार्यान्वयन के अधीन आते हों, कामगार मुआवजा अधिनियम के अन्तर्गत दरों के अनुसार मुआवजा अदा किया जाता है और अन्य मामलों में अनुग्रह भुगतान के रूप में मृत्यु हो जाने पर 900 रुपए प्रति व्यत्तिQ तथा पूण रूप से विकलांग होने की दशा में 1200 रुपए प्रति व्यक्ति अदा किए जाते हैं। सर्वप्रथम 300 रुपए तक प्रारंभिक भुगतान किया जाता है। माननीय सदस्य प्रत्यक्षतः इसी प्रारम्भिक भुगतान का उल्लेख कर रहे हैं।
(घ) यदि एकमुश्त राशि में मुआवजे की राशियां अदा की जाती हैं तो यह भुगतान टी एस्टेट के प्रबंधकों के उपायुत्तQों द्वारा किया जाता है यदि उनके आश्रित