164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) क्या सरकार अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के हेडक्वार्टर में भारतीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए कुछ कर रही है और यदि हां तो उसके परिणाम क्या हैं_ और
(घ) क्या सरकार का प्रस्ताव है कि अपने सचिवालय के कुछ सदस्यों को कुछ महीनों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के हेडक्वार्टर भेजा जाए ताकि वे श्रम विधान और इससे संबंधित कार्यशील देशों का अध्ययन कर सकें तथा अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के कार्य के संपर्क में रह सकें?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) यह समझा जाता है कि तीन भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के हेडक्वार्टर में रखे गए हैं। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय की भारतीय शाखा के सभी कर्मचारी भारतीय हैं। इनमें से एक वरिष्ठ अधिकारी होता है और इसके साथ वर्ष 1946 में सात सदस्यों की स्वीकृति दी गई है।
(ख) भारतीय सदस्यों के लिए उनके विभिन्न कार्यालयों में 1946 के लिए अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा जो व्यय किया गया है, वह इस प्रकार है -
हेडक्वार्टर ः 60,000 स्विस फ्रैंक अथवा रु. 45,000 लगभग
भारतीय शाखाएं ः रुपयं 44,640
भारत अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन में सीधे ही योगदान नहीं करता परन्तु भारत द्वारा भुगतान किया गया कुछ अंशदान लीग ऑफ नेशनल को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा किया जाता है। नीचे दी गई तालिका में विवरण दिखाया गया हैः-
लीग ऑफ नेशनल अन्तर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय वर्ष को कुल योगदान को आवंटित आंशिक भाग
(गोल्ड फ्रैंक्स) (गोल्ड फ्रैंक्स)
1943 893,044,24 300,731,88 1944 815,024,64 300,960,18 1945 1,99,033,39 895,200
(स्विस फ्रैंकस)
1946 1,302,938,67 ज्ञात नही
निदेशक, अन्तर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय, भारतीय शाखा से प्राप्त सूचना
नोटः
विनियम दरें- स. आ. पा.
एम गोल्ड फ्रैंक 1 1 5 लगभग
एक स्विस फ्रैंक 0 12 4