4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
टी स्टेट में ही रहते हों। यदि भुगतान किए जाने वाले व्यक्ति अल्प आयु के हैं और ऐसे व्यक्ति हैं जो अधिक राशियों के ले जाने में अक्षम हैं तो श्रमायुत्तQ, असम द्वारा इन राशियों को डाकघर में जमा कर दिया जाता है और इन राशियों में से डाकघर से मनीआर्डर द्वारा समय-समय पर किस्तों में धन भेजा जाता है। प्रारंभिक अवस्थाओं में डाकघर में राशियों के जमा करने तथा उन्हें भिजवाने में कुछ देर हो गई क्योंकि डाक विभाग इतनी अधिक राशियों के निवेश को संभालने में सक्षम न था परन्तु अब विधिवत रूप से राशियां प्रेषित की जा रही हैं।
(घ) जैसा कि इस प्रश्न के भाग (ग) के उत्तर में कहा गया है, कामगार मुआवजा अधिनियम के अधीन मामलों में भुगतान किए जाने वाले मुआवजे की दरें वे हैं जो इस अधिनियम की अनुसूची में दी गई हैं। अन्य मामलों में मृत्यु की स्थिति में 900 रुपए और स्थाई विकलांग होने की स्थिति में 1200 रुपए की राशि के भुगतान का प्रावधान इस अधिनियम में उस मजदूर के लिए स्वीकार्य है जिसे इसी प्रकार की नकद परिलब्धियां प्राप्त होती हैं। मुआवजे की इन दरों को पर्याप्त समझा जाता है।
(च) अधिकांश मामलों में आश्रित लोग अल्प आयु के व्यक्ति अथवा ऐसे व्यक्ति माने जाते हैं जो अधिक राशियों के ले जाने में सक्षम नहीं होते। इन मामलों में निवेशित राशि डाक मनिआर्डर द्वारा किस्तों में भेजी जाती है। टी एस्टेट के उपायुत्तQों और प्रबंधकों द्वारा केवल प्रारंभिक भुगतान और एकमुश्त राशि के भुगतान किए जाते हैं। यह राशि कुछ ऐसे मामलों में टी स्टेट के प्रबंधकों को भेजी जाती है जिनके आश्रित लोग टी स्टेट में रहते हैं। ऐसा करना आवश्यक समझा गया क्योंकि प्रबंधक आश्रित लोगों की पहचान कर सकेंगे, शीघ्र भुगतान करा सकेंगे तथा कामगार मुआवजा आयुत्तQ को राशि भेज सकेंगे। अभी तक यह पद्धति संतोषजनक रही है।
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ऽअसम परियोजनाओं से लौटे
मजदूरों का स्वास्थ्य खराब
1314. दीवान अब्दुल बासिथ चौधरीः (क) क्या श्रम सदस्य इस बात से अवगत हैं कि क्या सौ मजदूर असम की परियोजनाओं से निर्माण कार्यों से अधिक अस्वस्थ दशा में लौट आए हैं_
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2010