458 भारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) को मासिक अनुदान - Page 186

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 171

मैं नहीं समझता कि मेरे लिए इस अवस्था में यह आवश्यक है कि मैं इस विधेयक पर लम्बी टिप्पणियां करूं क्योंकि इस विधेयक पर प्रवर समिति ने विचार किया है। इस विधेयक में मूल रूप से सात खंड थे। इन सात खंडों में केवल चार ऐसे खंड हैं जिन पर प्रवर समिति ने विचार किया है और इस बारे में कुछ संशोधन किए हैं। ये संशोधन कामगारों के पक्ष में दिए गए मूल उपबंधों को उदार बनाने की दिशा में किए गए हैं। यद्यपि मुझे पता लगा है कि कुछ संशोधन विधेयक के मूल मसौदे में प्रवर समिति द्वारा किए गए थे और वे संशोधन सरकार के इरादों से परे हैं अतः मैं उस विधेयक पर कोई आपत्तियों उठाने का प्रस्ताव नहीं करता क्योंकि इस विधेयक को प्रवर समिति ने देख लिया है। मैं विधेयक को उसी रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार हूं जिस में यह अब है। श्रीमन् मैं प्रस्ताव करता हूं।

उप-सभापति ः प्रस्ताव प्रस्तुत किया गयाः

फ्कि कारखाना अधिनियम, 1946 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में विचार किया जाए।य्

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ऽभारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ

लेबर) को मासिक अनुदान

1632. श्री सत्य नारायण सिन्हा ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य का ध्यान 24 मार्च के नेशनल काल के रविवारीय प्रातः संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट की ओर दिलाया गया है जिसमें भारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) को श्रम के प्रचार के लिए 13,000 रुपये का मासिक अनुदान दिया गया है_

(ख) क्या यह सच है कि जब प्रचारकों के वेतन में कमी आ गई, तो समाचारो के प्रसार की लागत सानुपातिक रूप से बढ़ी है_ और

(ग) क्या यह सच है कि महालेखापरीक्षक ने लेखाओं के रखे जाने की घोर आलोचना की थी क्योंकि वह ले्रखा रखने की पद्धति से संतुष्ट नहीं थे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां।

(ख) 19 मार्च, 1946 को सदन के समक्ष भारतीय श्रम सेघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) के लेखाओं का विवरण रखा गया जिससे विदित होता है कि व्यय की भिन्नताओं के फलस्वरूप ‘प्रचारकों के वेतन’ से संबंधित शीर्ष के अन्तर्गत कमियां

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 5, 1946, 8 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3645