458 भारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) को मासिक अनुदान - Page 187

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दिखाई गई और मई, जून और जुलाई, 1945 के महीनों में हुई तदनुसार वृद्धियां शीघ्र ‘समाचार के प्रसार’ के अन्तर्गत दिखाई गई। ये भिन्नताएं व्यय के शीर्षों के वर्गीकरण के परिवर्तन के कारण हुई। ये शीर्ष अप्रैल, 1945 में प्रारंभ किए गए जब प्रचार योजना की कार्रवाईयों के नियंत्रण का हस्तांतरण सूचना और प्रसारण मंत्रालय से श्रम विभाग को किया गया था। अतः इसके फलस्वरूप श्रम केन्द्रों, कामगार क्लबों और समाचार प्रसार की अन्य ऐजेन्सियों के प्रभारी प्रचारकों को भत्तों का व्यय जो अब तक शीर्ष ‘कर्मचारियों का वेतन’ के अन्तर्गत दिखाया जाता था, मई, 1945 से आगे शीर्ष ‘समाचार-प्रसार के लिए मानदेय’ के अंतर्गत दिखाया जाने लगा। परन्तु इन महीनों में ‘प्रचारकों के वेतन’ और ‘समाचार के प्रसार’ से संबंधित शीर्ष के अन्तर्गत कुल व्यय गत महीनों के समान ही रहा।

(ग) श्री लालचन्द नवलराय द्वारा पूछे गए तारीख 2 नवम्बर, 1945 के प्रश्न संख्या 31 के प्रथम भाग (ख) और (घ) के उत्तर की ओर तथा 1943-44 के लेखाओं पर लोक लेखा समिति की रिपोर्ट के पैरा 68 की ओर माननीय सदस्य का ध्यान आकर्षित किया जाता है।

श्री सत्यनारायण सिन्हा ः उसके बाद क्या हुआ? क्या माननीय सदस्य इन सभी लेखाओं को कृपया लोक लेखा समिति के समक्ष रखना चाहेंगे? यह लोग धन की बरबादी है जैसा कि मेरा विश्वास है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः इस विषय में लोक लेखा समिति द्वारा विचार किया गया था और जैसा कि मैने अपने उत्तर में बताया है, माननीय सदस्य का ध्यान 1943-44 के लेखाओं के संबंध में लोक लेखा समिति की रिपोर्ट के पैरा 68 की ओर आकर्षित किया गया है।

दीवान चमन लाल ः क्या मैं अपने माननीय मित्र से पूछ सकता हूं कि 1945 के बाद की स्थिति क्या है और क्या यह अनुदान अब हटा दिया गया है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः इसे हटा दिया गया है।

दीवान चमन लाल ः 1945 और हटाए जाने के बीच इसकी क्या स्थिति थी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मुझे सूचना नहीं मिली है परन्तु यदि मेरे माननीय मित्र प्रश्न करते हैं तो मैं उत्तर दूंगा।

दीवान चमन लाल ः क्या सच है कि इन लेखाओं का उस समय पुनरीक्षण किया गया था जब यह अनुदान हटाया गया था?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मुझे इस प्रश्न के उत्तर के लिए नोटिस की आवश्यकता है।