विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 173
दीवान चमन लाल ः मेरे माननीय मित्र को यह ज्ञात नहीं है कि क्या इसके बाद इनका पुनरीक्षण किया गया था?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं आपको बता नहीं सका।
श्री सत्यनारायण सिन्हा ः क्या माननीय सदस्य इस पूरे मामले को देखना चाहेंगे?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैने देखा है। मैं इससे अधिक क्या कर सकता हूं।
श्री मनु सूबेदार ः भारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) के माध्यम से श्रम प्रचार पर व्यय की राशि इस समय क्या है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जैसा कि मैने बताया, यह अनुदान बंद कर दिया गया है।
श्री मोहन लाल सक्सेना ः क्या मैं यह जान सकता हूं कि यह कब बंद किया गया?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः गत वर्ष, यदि यह बताने में मुझसे भूल न हो।
कुमारी मनीबेन कारा ः क्या यह सच नहीं है कि जिस समय यह अनुदान दिया गया था, उस समय सूचना और प्रसारण विभाग ने जो पद्धति अपनाई थी, उसी के अनुसार यह अनुदान दिया गया?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मेरा यही विश्वास है।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः क्या यह सच नहीं है कि भारतीय श्रम संघ ने अनुदान दिए जाने के बाद काफी समय तक कोई पद्धति निर्धारित नहीं की थी तथा महालेखा-परीक्षक ने उस प्रक्रिया पर घोर आपत्ति की जो विभाग द्वारा अपनाई गई थी?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जैसा कि मैने अपने उत्तर के दौरान यह बताया है, यह अनुदान वास्तव में सूचना और प्रसारण विभाग द्वारा प्रशासित किया गया था। बाद में प्रशासन का कार्य श्रम विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया।
दीवान चमन लाल ः क्यों?
कुमारी मनीबेन कारा ः क्या यह सच नहीं है कि मई, 1944 से पूर्व संघ से कहा गया था कि वे वाउचर प्रस्तुत करना बंद कर दें और उनसे कहा गया था कि वे केवल लेखे प्रस्तुत करें और क्या उस विभाग के निदेशों के बावजूद भारतीय श्रम संघ (इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर) ने ऐसा नहीं कहा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं यह बताने में असमर्थ हूं। यह मामला किसी अन्य विभाग ने प्रशासित किया था।