174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुमारी मनीबेन कारा ः क्या यह सच नहीं है कि युद्ध की समाप्ति के बाद यह अनुदान बंद कर दिया गया है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जी हां, मैने यही कहा था।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः इनमें से कितने लोग जो इस अनुदान के अन्तर्गत ‘समाचारों के प्रसार’ के लिए प्रचारकों के रूप में पहले लगे हुए थे, सूचना और प्रसारण विभाग में काम पर लगा लिए गए थे?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः यह प्रश्न सूचना और प्रसारण विभाग के माननीय सदस्य के समक्ष रखा जाना चाहिए।
श्री मोहन लाल सक्सेना ः क्या मैं यह जान सकता हूं कि यह अनुदान युद्ध की समाप्ति या इसके बाद समाप्त किया गया था?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं ठीक से नहीं बता सकता।
श्री मोहन लाल सक्सेना ः क्या यह अनुदान गत वर्ष अप्रैल, 1945 में समाप्त नहीं किया गया था?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जी हां।
दीवान चमन लाल ः क्या मैं अपने माननीय मित्र से पूछ सकता हूं कि क्या अंतिम लेखाओं को लोक लेखा समिति के समक्ष रखा गया है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मुझे विश्वास है कि समय के साथ उन लेखाओं को लोक लेखा समिति के समक्ष रखा जाएगा।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः क्या यह सच नहीं है कि इस 30,000 रुपये की राशि का दुरूपयोग किया गया? यह राशि उस प्रयोजन के लिए व्यय नही की गई जिसके लिए सरकार ने इस राशि का आवंटन किया था और यह राशि माननीय सदस्य की पार्टी के प्रचार-कार्यों पर व्यय की गई।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं मेरे माननीय मित्र के इस कथन का घोर विरोध करता हूं कि यह राशि पार्टी के प्रचार कार्यों के लिए व्यय की गई। आप अपने शब्द वापस लीजिए।
सभापति महोदय ः शांति, शांति।
प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः उन्होने यह नहीं कहा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः जी हां, उन्होने यही कहा था।