विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 183
सभापति महोदय ः क्या माननीय सदस्य ने इसका पहले ही उत्तर नहीं दिया है?
श्री अहमद ई. एच. जफर ः नहीं, श्रीमन्!
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः ये आंकड़े बिल्कुल स्पष्ट हैं।
श्री अहमद ई. एच. जफर ः इसका अर्थ यह है कि माननीय सदस्य इस बात से सहमत हैं कि मुसलमानों का कोटा 25 प्रतिशत से कम है। क्या मैं माननीय सदस्य से पूछ सकता हूं कि क्या वह शीघ्र ही यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने को तैयार हैं कि मुसलमानों के कोटे को समुचित रूप से निभाया जाए?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः माननीय सदस्य का ध्यान प्रश्न के भाग (ग) के उत्तर की ओर आकर्षित किया जाता है।
डॉ सर जियाउद्दीन अहमद ः यदि यह स्थिति स्वीकार कर ली जाती है तो कोई भी मुसलमान नियुत्तQ न होगा। माननीय सदस्य किसी अन्य व्यत्तिQ को काम करते रहने के लिए कहते रहेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः गृह विभाग द्वारा जो परिपत्र जारी किया गया है, उसके विरूद्ध वास्तविक शिकायत है और यह शिकायत श्रम विभाग के विरूद्ध नहीं है।
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ऽऔद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य) ः मैं औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियोत्तQओं से औपचारिक रूप से अपने अधीन रोजगार की शर्तो को परिभाषित करने की अपेक्षा करने वाले विधेयक को पुरःस्थापित करने की अनुमति का प्रस्ताव करता हूं।
दीवान चमनलाल (पश्चिम पंजाब गैर मुसलमान) ः मैं व्यवस्था के प्रश्न के रूप में क्या पूछ सकता हूं कि यह विधेयक कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है जब कि दूसरे विधेयक पर विचार विमर्श किया जा रहा है? क्या यह उचित न होगा कि इस विधेयक पर तभी चर्चा की जाए जब पहले विधेयक पर बहस पूरी हो जाए?
सभापति महोदय ः हमने दूसरे विधेयक पर अभी बहस शुरू नहीं की है जो सदन के समक्ष लम्बित है। यह विशुद्ध रूप से औपचारिक मामला है। यह अधिक सुविधाजनक है और जहां तक मैं समझता हूं कि इसके पूर्व उदाहरण भी हैं। जहां
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 5, 1946, 8 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3667