184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सदन के समक्ष विचाराधीन मामले को आस्थगित कर दिया गया है और दूसरे मामले पर विचार-विमर्श किया गया है। यह विशुद्ध रूप से प्रक्रिया तथा समायोजन का मामला है।
प्रश्न यह हैः
फ्औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियोत्तQाओं से औपचारिक रूप से अपने अधीन रोजगार की शर्तों को परिभाषित करने की अपेक्षा रखने वाले विधेयक को पुरःस्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाये।य्
प्रस्ताव स्वीकार हुआ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः श्रीमन् मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूं।
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ऽसभा पटल पर रखे गये पत्र
श्रमिक जाँच समिति के प्रतिवेदन
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य) ः श्रीमन्, मैं श्रमिक जांच समिति के निम्नलिखित प्रतिवेदनों की एक-एक प्रति सभा पटल पर रखता हूंः-
(1) भारत के रेशम उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं के बारे में जांच का प्रतिवेदन।
(2) भारत में सीमेंट उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं के बारे में जांच का प्रतिवेदन।
(3) कार्पेट (कालीन) बुनाई में लगे श्रमिकों की दशाओं के बारे में जांच का प्रतिवेदन।
(4) कच्चे लोहे के उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं के बारे में जांच का प्रतिवेदन।
(5) क्वायर (नारीयल-जटा) की चटाइयों और चटाई उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं के बारे में प्रतिवेदन।
(6) अभ्रक खनन और अभ्रक निर्माण उद्योग में लगे मजदूरों की दशाओं की जांच पर प्रतिवेदन।
(7) भारत में डॉकयार्ड के श्रमिकों की दशाओं की जांच पर प्रतिवेदन।
(8) शलॉक उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं का प्रतिवेदन।
(9) रिक्शा चालकों पर प्रतिवेदन।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 5, 1946, 9 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3744