468 मर्चेण्ट नेवी के अधिकारियों पर राष्ट्रीय श्रमिक न्यायाधिकरण अध्यादेश (नेशनल लेबर ट्रिब्यूनल आर्डिनेंस) - Page 204

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 189

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ऽमर्चेण्ट नेवी के अधिकारियों पर राष्ट्रीय श्रमिक न्यायाधिकरण
अध्यादेश (नेशनल लेबर ट्रिब्यूनल आर्डिनेंस)

1757. कुमारी मनीबेन कारा ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या दिसम्बर, 1944 में भारतीय रजिस्ट्री के जहाजों के प्रमाणित अधिकारियों पर लागू किया गया राष्ट्रीय श्रमिक न्यायाधिकरण अध्यादेश नेशनल लेबर ट्रिब्यूनल आर्डिनेंस) आपातकालीन कानून था_

(ख) क्या सरकार के विचार में वैसी ही आपातकाल की स्थिति अब मौजूद हैं_ यदि हां तो इसके क्या कारण हैं_ और

(ग) नाविकों की स्वतंत्रता पर लगाए गए उन प्रतिबंधों की दृष्टि से, जो अध्यादेश ने लागू किए हैं, सरकार का प्रस्ताव है कि इस अध्यादेश को शीघ्र ही प्रतिसंहरण किया जाए जहां तक मर्चेण्ट नेवी के अधिकारियों का संबंध है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) जी हां।

(ख) नहीं।

(ग) राष्ट्रीय सेवा (तकनीकी कर्मचारीवर्ग) अध्यादेश, 1940 के उपबंधों को फरवरी, 1946 से शिथिल कर दिया गया है और अब उनका उपयोग तकनीकी कर्मचारियों को राष्ट्रीय सेवा मे सम्मिलित करने में नहीं होता। तकनीकी कर्मचारियों की गतिविधियों पर नियंत्रण, राष्ट्रीय महत्व के कार्य पर लगे तकनीकी कर्मचारियों के सिवाय शिथिल कर दिया गया है। जहाजों के पायलेटों के मामले में अध्यादेश के उपबंध अप्रैल, 1946 के अंतः तक उन्हें अपने कर्त्तव्य के पदों पर रखने के लिए आवश्यक कार्यक्षेत्र में आहवान करते हैं। इस तारीख तक यह आशा की जाती है कि इन क्रियाओं से नियंत्रण हटा लिया जाए जब तक यह न पाया जाए कि बन्दरगाहों पर आयातित, खाद्यात्रों के शीघ्र निपटाने के हित में वह आवश्यक है। यह प्रस्ताव है कि अप्रैल, 1946 के अंत तक अन्य टेक्नीकल कर्मचारियों के आने-जाने पर लगाए गए सभी नियंत्रण हटा लिए जाएं।

कुमारी मनीबेन कारा ः क्या माननीय श्रम सदस्य इस बात से अवगत हैं कि विशेषकर भारतीय कम्पनियों द्वारा भारतीय मर्चेन्ट नौ (नेवल) अधिकारियों के विरूद्ध

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 5, 1946, 12 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3887