194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सलाह दी जाती है कि इस प्रकार के संस्थापन जबकि वे चयनित क्षेत्रों में मौसम विज्ञान संबंधी दशाओं पर आश्रित होते हैं, वैकल्पिक रूप से बहुत ही कम पॉवर उत्पादन कर पाते हैं और वह भी रूक रूक कर होता है।
(घ) भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को हाल ही में पुनर्गठित किया गया है और उसकी प्रयोगशाला की सुविधाओं का काफी विस्तार किया गया है। इसके अलावा
खनिज और खनन के मामलों में निःशुल्क सलाह और सूचना उपलब्ध कराने की दिशा में विस्तार करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। हाल ही में नियोजित राष्ट्रीय धातुकर्मीय और राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशालाओं को सुसज्जित किया जाएगा ताकि भारतीय खनिजों की गुणवता का मूल्यांकन किया जा सके और अन्य दिशाओं में
खनिज उद्योगों के विकास में अधिक सहायक सिद्ध हो। भारत के खनिजों तथा खान के कच्चे माल को घरेलू काम तथा उपयोग के लिए उनके कच्चे रूप में निर्यात की अपेक्षा वरीयता दी जा रही है और इस बारे में सरकार द्वारा विचार किया जा रहा है। 1944 से अनेक औद्योगिक पैनल स्थापित किए गए हैं और इस बारे में मूल्यवान सूचना और आंकड़े एकत्र किए गए हैं जिनका अध्ययन नयी खनिज नीति के बनाने के लिए किया जा रहा है।
प्रोफेसर एन.जी. रंगा ः भाग (ग) के संबंध में माननीय सदस्य बताते हैं कि हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पॉवर (जल वैद्युत पॉवर) संसाधनों के विकास के लिए अभी कई विशेषज्ञों की आवश्यकता है। सरकार इस बारे में क्या कदम उठा रही है कि इन विधाओं में विशेषज्ञता प्राप्त करने के लिए अपेक्षित क्षमताओं और योग्यताओं के भारतीय मिलें ताकि उनकी सेवाओं का उपयोग हो सके?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः इन विशिष्ट व्यवसायों में प्रशिक्षण हेतु कई भारतीयों को विदेश भेजा गया है।
प्रोफेसर एन.जी. रंगा ः विद्यार्थियों को विदेश भिजवाने की इस नई योजना के भाग अन्तर्गत?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः इनके अलावा अन्य ऐसे व्यक्ति हैं जो विदेश भेजे गए हैं।
प्रोफेसर एन.जी. रंगा ः भाग (घ) के संदर्भ में मेरे माननीय सदस्य ने उस सुझाव की अवहेलना कर दी कि वायु शक्ति का उपयोग किया जाए और उस बारे में यह कह दिया कि इससे रूक रूक कर शक्ति उत्पन्न होती है और उसके अलावा