विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 11
विद्यार्थियों को विदेश भेजा जाए_ दूसरी योजना यह है कि पहले ही से उद्योग में नौकर तकनीशियनों को अधिक प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जाए अथवा औद्योगिक अथवा व्यावसायिक अनुभव के बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों को विदेश में ट्रेनिंग हेतु भेजा जाए। पहली योजना का कार्यान्वयन शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि विभाग द्वारा किया जाता है और दूसरी योजना का कार्यान्वयन श्रम विभाग द्वारा किया जाता है।
(ग) प्रस्तावित योजना एक प्रकार से बोविन प्रशिक्षण योजना का विस्तार है। इस योजना का उद्देश्य यह है कि उद्योग में अधिक महत्वपूर्ण पर्यवेक्षक पद के लिए उच्च तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
(घ) श्रम विभाग के अधीन जिन प्रशिक्षण योजनाओं पर विचार किया गया, वे इस प्रकार हैंः मेकेनिकल इंजीनियरी, विद्युत इंजीनियरी, रेडियो निर्माण, जहाज निर्माण, वैज्ञानिक इंजीनियरी, समुद्री इंजीनियरी, सिविल इंजीनियरी, संरचनात्मक इंजीनियरी, धातु-कर्म, विद्युत-उत्पादन, लोकोमोटिव निर्माण, रसायनिक इंजीनियरी, उर्वरक, प्लास्टिक, कांच, स्टील निर्माण।
(घ) यह सूची अन्तिम नहीं है और यदि आवश्यकता हुई तो इस प्रकार के प्रशिक्षण पर भी विचार किया जाएगा।
सामान्य तौर पर प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष होगी परन्तु वैयक्तिक मामलों में यह अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
(घ) कोई भी कोटा आवंटित नहीं किया गया है। प्रान्तीय सरकारों को अपने नामांकन देने के लिए कहा गया है जिनके लिए उन्हें लागत पूरी करनी होगी। निजी नियोत्तQ अपने नामांकन कर रहे हैं। भारत सरकार इन नामांकनों में से अंतिम चुनाव करेगी।
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ऽगुडूर डिवीजन में अभ्रक खानों में कामगार
1327. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) गुडूर डिवीज़न में अभ्रक खानों में भूमिगत स्थलों और सतह पर काम में लगाए गए पुरूष और महिला कामगारों की संख्या क्या है_
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1945, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2010