321 गुडूर डिवीजन में अभ्रक स्पि्लटिंग (चीरने वाले) कारखानों में कारखाना अधिनियम आदि का लागू किया जाना - Page 27

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) उनके दैनिक औसतन मजदूरी तथा मंहगाई भत्ता क्या है_

(ग) क्या यह सत्य है कि वे अधिकांशतया उन ठेकेदारों के माध्यम से काम पर लगाए जाते हैं जो उनकी मजदूरी का प्रतिशत भाग लेते हैं_ और यदि हां, तो इस पद्धति के चालू रखने के क्या कारण हैं_ और

(घ) क्या सरकार इन खानों की दशा के बारे में जांच करेगी और उसकी सूचना सभा को देगी_ यदि हां तो कब?

माननीय डा. बी. आर. अम्बेडकरः (क) गुडूर क्षेत्र की अभ्रक खानों में काम पर लगाए गए पुरूष और महिला कामगारों की संख्या लगभग 7,000 और 4,000 है। किसी भी महिला को भूमिगत स्थल में कार्य करने की अनुमति नहीं है।

(ख) पुरूष के लिए औसत दैनिक मजदूरी 12 रुपए तथा महिला के लिए औसत दैनिक मजदूरी 7 रुपए है। चूँकि मजदूरी की दर को हाल ही में बढ़ाया गया है और

खान के मालिकों द्वारा मजदूरी प्रत्यक्ष रूप से अदा की जाती है और ठेकेदारों के द्वारा मजदूरी अदा नहीं की जाती।

(घ) नहीं, प्रश्न का दूसरा भाग नहीं उठता।

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ऽगुडूर डिवीजन में अभ्रक स्प्लिटिंग (चीरने वाले)

कारखानों में कारखाना अधिनियम

आदि का लागू किया जाना

1328. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या यह सच है - ( i ) कि कारखाना अधिनियम गुडूर डिवीजन में अभ्रक स्प्लिटिंग (चीरने वाले) कारखानों पर लागू नहीं होता_

( ii ) कि यहां काम पर लगाई गई अधिकांश महिलाएं हैं और उन्हें प्रसूति लाभ अधिनियम का कोई लाभ नहीं मिलता है_

( iii ) कि महिला कामगारों के शिशुओं और बच्चों की देखभाल का कोई प्रबंध नहीं है_

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1945, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2020