325 विदेश में तकनीकी उद्योगों में प्रशिक्षण के लिए योजना - Page 31

16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) क्या सरकार ने खानों में काम करने वाली महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच (शिशु गृह) उपलब्ध कराने हेतु विचार किया है_ और

(ग) क्या इस तथ्य के परिप्रेक्ष्य में कि सदस्यों द्वारा अपने अनुभव से सदन में वत्तQव्य दिए गए हैं कि ये क्रेच नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि ये क्रेच उपयुत्तQ ढंग से कार्य करें?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (क) आवश्यक विधान पहले से ही सदन के समक्ष विचार्थ है।

(ख) और (ग) खानों में क्रेचों की अनिवार्य व्यवस्था का प्रश्न विचाराधीन है।

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ऽविदेश में तकनीकी उद्योगों में

प्रशिक्षण के लिए योजना

1359. श्री टी. एस. अविनाशलिंगम चेटिट्यारः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में बताए गए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों में दिये गये प्रशिक्षण के अलावा क्या सरकार के पास ऐसी कोई योजना है कि तकनीकी उद्योगों में व्यक्तियों को तैनात किया जाए और उनको प्रशिक्षण दिया जाए ताकि युद्धोत्तर अवधि में उद्योगों के प्रारंभ करने में उनका उपयोग किया जा सके_

(ख) क्या भारत सरकार ने इंग्लैंड अथवा अमरीका की सरकार या उद्योगों के साथ ऐसे व्यक्तियों के प्रशिक्षण के लिए बातचीत की है_ और

(ग) यदि हाँ तो वे उद्योग कौन-कौन से हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (क) जी हां। माननीय सदस्य का ध्यान श्रम विभाग के पत्र संख्या टी.आर.सी.- II -1140, दिनांक 12 दिसम्बर, 1944 की ओर आकर्षित किया जाता है और इस पत्र की प्राप्ति सदस्य द्वारा पूछे गए प्रश्न संख्या 198 के उत्तर में सदन के पटल पर 14 फरवरी, 1945 को रखी गई थी।

(ख) सरकारों के साथ।

(ग) सामान्य आधारों पर और विशिष्ट उद्योगों तक सीमित न होने पर बातचीत होती रही।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1945, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2029