18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री टी. एस. अविनाशलिंगम चेटिट्यारः पृष्ठ 27 पर दिया गया स्पष्टीकरण इस प्रकार हैः
फ्अतिरिक्त प्रान्तीय और क्षेत्रीय श्रम सप्लाई समितियों, श्रम सप्लाई डिपो और श्रम सप्लाई ब्यूरो की स्थापना के कारण।य्
मैं पृष्ठ 12 पर श्रम के लिए मांग के अन्तर्गत देखता हूंः
फ्प्रान्तीय और क्षेत्रीय श्रमिकों की सप्लाई समितियों और श्रमिकों की सप्लाई डिपो के कार्य के समन्वयन के लिए अकुशल श्रमिकों की सप्लाई के निदेशालय का खोला जाना।य्
श्रीमन, मेरा यह विचार है कि इसमें यह बात दो बार अलग-अलग कही गई है। मैं यह जानना चाहूंगा कि इन दोनों में क्या अंतर है?
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः वह मांग निताँत भिन्न थी। वह मांग अधिकारियों के वेतन से संबंधित थी। इसका संबंध अधिकारियों के वेतन से है जबकि यह मांग बिल्कुल ही भिन्न है। यह कतिपय श्रमिकों की सप्लाई समितियों, लेबर ब्यूरो और लेबर सप्लाई डिपों के खोले जाने के कारण है। यह वह लागत है जो कामगारों के संबंध में हुई है और यह सचिवालय के अधिकारियों के वेतन के संदर्भ में है।
श्री टी. एस. अविनाशलिंगम चेटिट्यारः मैं इसे फिर पढ़ना चाहूंगा।
अतिरित्तQ प्रांतीय और क्षेत्रीय श्रम सप्लाई समितियों की स्थापना के कारण......य्
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यह समन्वय के लिए है। यह समन्वय कार्य सचिवालय में होता है। पृष्ठ 12 पर इी गई मद का संदर्भ सचिवालय में काम करने वाले अधिकारियों के वेतन से है जबकि इस मांग का संदर्भ उस कार्य से है जो सचिवालय के बाहर किया जाता है।
सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः प्रश्न यह है_
फ्कि विविध विभागों के संबंध में 31 मार्च, 1945 को 10,00,000 रुपये से अनधिक राशि की पूरक अनुदान गवर्नर जनरल-इन-काँसिल को दिया जाए।य्
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।