22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खोले जाने के घंटों को कम कर दें और प्रति व्यक्ति बेची गई शराब की मात्रा पर प्रतिबंध लगा दें तथा वेतन भुगतान के दिन उन दुकानों को बंद कर दें?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (क) जी हां। रेलवे तथा अन्य संगठनों की कोयला खानों के पड़ोस में शराब की दुकानें हैं। मुझे खेद है कि इस समय मेरे पास इन दुकानों के खुलने के दिनों और घंटों की कोई सूचना नहीं है। परन्तु मैं वह सूचना प्राप्त करूंगा और सभा पटल पर रख दूंगा।
(ख) नहीं।
(ग) सरकार शराब तथा कोयला खानों में काम करने वाले कामगारों के स्वास्थ्य तथा उत्पादन के बीच संबंधों के बारे में सामान्य रिपोर्ट मंगाएगी।
(घ) आबकारी प्रशासन प्रांतीय विषय है। फिर भी रिपोर्ट प्राप्त होने पर सरकार शराब की दुकानों के संबंध में आवश्यक सिफारिशों पर विचार करेगी।
मुझे यह भी बताना चाहिए कि लगभग दिसंबर 1944 में बिहार के कोयला क्षेत्रों में आसवनी शराब की खुदरा कीमतों में वृद्धि की गई और प्रांतीय सरकार बढ़ाई गई कीमतों के प्रभाव को देख रही है तथा उसके बाद ही शराब की उपयोगिता को प्रतिबंधित करने के लिए अन्य कारवाई की जाएगी। बंगाल से गत वर्ष एक रिपोर्ट प्राप्त की गई जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि बंगला के कोयला क्षेत्र में शराब के अधिक पीने की उपयोगिता के कम साक्ष्य हैं।
श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः श्रीमान् इस तथ्य के परिप्रेक्ष्य में, कि देश में कोयले की स्थिति अति गंभीर है और यह आवश्यकता है कि कोयले की खानों से अधिकतम उत्पादन किया जाए, ऐसी स्थिति में सरकार उन खानों के पड़ोस में शराब की दूकाने बंद करने के महत्वपूर्ण कदम उठाएगी, चाहे यह प्रांतीय मामला ही क्यों न हो?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे यह कहने में आशंका है कि इस बारे में हमारा कोई नियंत्रण नहीं है जैसा कि माननीय सदस्य ने सुझाव दिया है।
श्री जी. रंगैया नायडूः क्या मैं यह जान सकता हूं कि क्या स्थानीय सरकार की अनुमति से कोयला खानों के पड़ोस में शराब की दूकानें खोली गई थीं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं यह कहता हूं कि यह मामला प्रांतीय सरकार का है।