38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽअभ्रक की खानों में भारतीय हितों की सुरक्षा
1709. प्रो. एन. जी. रंगाः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या उनका ध्यान 16 मार्च, 1945 का फ्री प्रेस जर्नल में छपे फ्इंडिया चीफ् प्रोड्यूसर ऑफ माइकाय् (अभ्रक का मुख्य उत्पादक भारत) शीर्षक के अन्तर्गत प्रकाशित लेख की ओर दिलाया गया है जिससे यह बताया गया है कि ब्रिटिश और अमरीकी हित भारत की अभ्रक खानों पर नियंत्रण पाने की कोशिश में लगे हैं_
(ख) यदि यह सच है तो सरकार इस समय अभ्रक उद्योग में लगे लोगों के अधिकारों के बारे में क्या सुरक्षा साधन अपना रही है और उन भारतीय संयुत्तQ स्टॉफ कम्पनियों के अधिकारों के बारे में क्या सुरक्षा साधन अपना रही है जिन्होंने अभ्रक के अधिकार प्राप्त कर लिए हैं_
(ग) भारत में अभ्रक खानों में कितनी भारतीय संयुत्तQ स्टॉक कम्पनियां रूचि लेती हैं_
(घ) पूंजी इश्यू के नियंत्रण द्वारा कितने आवेदन-पत्र प्राप्त हुए हैं कि अभ्रक के संबंध में नई कम्पनियों के रूप में उन्हें रजिस्टर किया जाए और इस बारे में कितनी कम्पनियों को अनुमति दी गई है तथा उन कम्पनियों के नाम क्या हैं_ और
(घ) क्या सरकार का यह प्रस्ताव है कि भारतीयों को अभ्रक के संबंध में अधिकारों के लिए यह आश्वासन दिया जाएगा कि अधिक शत्तिQशाली ब्रिटिश और अमरीकी स्वत्वाधिकारियों की धमकी से उन्हें बचाया जाएगा कि उन्हें उनके वर्तमान अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (क) 16 मार्च, 1945 के फ्री प्रेस जर्नल में सम्बन्धित लेख नहीं मिला।
(ख) प्रश्न नहीं उठता।
(ग) 31 मार्च, 1943 को अंत होने वाली अवधि के लिए प्राप्त वार्षिक विवरण् ा के अनुसार संख्या बीस है। इसके बाद की सूचना उपलब्ध नहीं है।
(घ) पूंजी इशू के परीक्षक द्वारा आवेदन-पत्र प्राप्त किए गए हैं और कुछ मामलों में अनुमति दी गई है। संबंधित विभाग की यह प्रथा नहीं है कि उन फर्मों के नाम बताए जाए जिनके काम-धाम को वह देख रहा है।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1945, 9 अप्रैल, 1945, पृष्ठ 2619