358 दिल्ली में अतिरित्तफ़ सरकारी इमारतें - Page 64

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 49

नहीं किए गए हैं। उन लिपिकों और सहायकों अथवा अधीक्षकों की संख्या के बारे में सूचना तुरंत उपलब्ध नहीं है जिन्होने क्वार्टरों के लिए आवेदन-पत्र दिए हैं परन्तु उन्हें क्वार्टर नहीं मिले हैं।

(ग) ऐसे अधिकारियो के लिए नई दिल्ली और करोलबाग में लिए जाने वाले फलैटों की संख्या 188 है जो 600 रुपये से कम वेतन नहीं पाते हैं।

(घ) 3.

(घ) यह संभव नहीं है कि किसी आवेदक द्वारा क्वार्टर पाने की संभावना पर सूचना उपलब्ध कराई जाए क्योंकि यह स्थिति कई कारकों पर निर्भर होती है जिनके बारे में पूर्वाभास नहीं हो पाता यथा नई दिल्ली में तैनाती की तारीख क्या होगी, उसके वेतन की राशि, क्या वह अकेला है, विवाहित है अथवा परिवार के साथ है, उसकी विशेष प्रकार के क्वार्टर की वरीयता क्या है, आदि।

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ऽदिल्ली में अतिरित्तQ सरकारी इमारतें

25. श्री एम. अनन्तशायनम आय्यंगरः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि -

(क) क्या इम्पीरियल सेक्रेटेरियर इमारतों के उत्तर और दक्षिण में और नई दिल्ली में अलग बैरक और इमारतें बनाई गई है ताकि वे अमरीकी, ब्रिटिश और भारतीय कर्मचारियों के उपयोग में रहे परन्तु अब ये इमारतें उपयोग के लिए बेकार हो गई हैं और यदि हां तो ऐसी कितनी इमारतें हैं_

(ख) उल्लिखित (क) में इमारतों में कुल कमरों की संख्या क्या है_

(ग) क्या अब इनमें कोई भी कार्यालय स्थित हैं और यदि नहीं तो उनके उपयोग के लिए क्या प्रस्ताव है_

(घ) क्या यह प्रस्ताव है कि इन इमारतों को अभी अथवा निकट भविष्य में आवंटित किया जाए, ताकि यथावश्यक रसोईघरों और स्नानागृहों में कुछ परिवर्तन करके उन्हें ( i ) कार्यालय उपयोग और ( ii ) आवास गृह के लिए उपयोग किया जाए_

(घ) यदि ऊपर (घ) का उत्तर सकारात्मक है तो क्या अभी तक कोई क्वार्टर आवंटित किया गया है_ यदि हां तो कितने क्वार्टर आवंटित किए गए हैं_ और

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1946, पृष्ठ 478-79